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Hello Guys Happy Republic day to all 🙂
So today I am going to present some data from census ,let's start from 2 pics ,one from post independence first census of 1951,and other from census 2011
मुझे अब ये जमाना रास नहीं आता
लोग जानते है एक दूसरे को
मगर अब पहचानना नहीं आता
खुद में कैद लोगो से
क्या ही बात की जाए
वो कभी सच नहीं बोलेंगे
तो किस्से बात की जाए
लोग अब खुद का सच भी
बोलने से डरते है
सब एक जिंदा मुर्दे की तरह
आगे चलते रहते है
किस दौड़ में है
ये उन्हें भी पता नहीं
काफी भयानक किस्म के चूतियाँ लगते हो,न संदर्भ की समझ है ना ही वाकये की,पर हा प्रतिक्रिया देनी है तो चमन चूतिये जैसे मुंह उठा कर चले आए और कुछ भी अंड बंड लिख देना है,अच्छा होता कि कुछ बेहतर प्रतिक्रिया देते,पर नहीं गटर का ढक्कन जब खुलेगा तो बदबू ही देगा ना
unavailable
आज अभी मैने ट्विटर के सर्वश्रेष्ठ छिनरे कुर्मी नरेश @agri_codewizard को काल करने का अपराध कर दिया है 😒
मतलब तेरे नाम फिल्म का साला कॉलर ट्यून लगा कर बैठा है 😑
अरे ये कैसा मानसिक अत्याचार है उन लोगों पर जो गलती से कॉल करने का प्रयास भी करे 😠
जो एक बार दिल से निकल जाते है फिर वो जीवन भर के लिए अंजान बन जाते है
😒
जो शब्द एक बार मुँह से निकल जाते है
वो बस पार्लियामेंट में ही वापिस लिए जाते है
🤧
जो एक बार जेब से निकल जाते है
वो नोट वापिस कभी जेब में नहीं आते है
😑
जो लोग जेसीबी चलाते है
वो दुबारा वही गड्ढा खोदने...
आज से 25 साल पहले तक जब रात में बिजली चली जाती थी तो,बिजलीघर पर लोग जाते थे,शिकायत करते थे,और तत्काल कार्यवाही न होने पर एक छोटी सी संयमित भीड़ वहां पहुंच जाती थी उसी गली,या मुहल्ले या कॉलोनी की,और कर्मचारियों के साथ मिल कर समस्या का समाधान करवाती थी,खैर आज तो लोग
ये सुविधा सबके लिए नहीं होगी,जैसे कि आज खराब टेलीकॉम सर्विस से ले कर सात पानी पीने जैसी बुनियादी जरूरते भी आजादी के 79 साल बार भी पूरी न हुई,और होंगी भी नहीं,क्योंकि भारत एक देश नहीं,एक समाज नहीं,एक संस्था भी नहीं,ये बस एक बहुत बड़ी वैश्विक स्तर को झोपड़पट्टी है धारावी जैसी
पहले तो वेद,पुराण और धर्म शास्त्रों का उल्टा सीधा अनुवाद करो,और जब उसमें निहित गूढ़ अर्थ समझ न आए,तो मुग़लों और अंग्रेजों का सहारा ले कर उनमे छेड़छाड़ की बात शुरू कर दो जिससे कि उन्हें अपने साँचे में ढालने का मौका मिले,ये संघीयो और आर्यसमाजियों का पुराना एजेंडा रहा है
Haridwar, Uttarakhand: Yog guru Baba Ramdev says, "Except for the Vedas, other Sanatan scriptures have been altered during the Mughal and British periods. To address these interpolations and incorrect interpretations by those who lack a comprehensive understanding of Sanatan Dharma and view it in fragmented forms without understanding its true essence, corrective measures will be taken...To present the purest form of Sanatan Dharma to the entire world, a large committee of scholars will be constituted in the presence of the leading religious authorities, gurus and revered saints from all sects and traditions. The committee will work on how to present the purest form of Sanatan Dharma to the world..."
यही आग़ाज़ था मेरा
यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था
मुझे नाकाम होना था
मेरी तक़दीर ने मुझको
तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को
टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको
आवारा बना डाला
🙂
࿗ Anभिज्ञ ࿗ retweeted
यूजीसी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर सवाल पूछना किसी युवा जनप्रतिनिधि का लोकतांत्रिक अधिकार है। प्रयागराज में युवा पार्षद रोहित तिवारी को डिप्टी सीएम केशव मौर्य से सवाल पूछने पर थप्पड़ मारना बेहद निंदनीय है। सवालों का जवाब थप्पड़ से देना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है, नेतृत्व की मजबूती को नहीं। लोकतंत्र में असहमति और सवालों की जगह होनी चाहिए, डर और हिंसा की नहीं। सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि जनता सवाल पूछने के लिए है, सिर्फ जयकारे लगाने के लिए नहीं।
प्रयागराज के ब्राह्मण सम्मेलन में UGC ROLLBACK का सवाल पूछने पर रोहित तिवारी काका को भाजपा पार्षद विनय मिश्रा उर्फ सिंटू द्वारा थप्पड़ मारे जाने का आरोप है। अब इस घटना का वीडियो भी सामने आ चुका है।
इसके साथ ही यह भी चर्चा सुनने में आ रही है कि राष्ट्रीय परशुराम सेना ब्रह्मवाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित विमल तिवारी ने केशव प्रसाद मौर्य के हाथों इस ब्राह्मण सम्मेलन का 20 लाख रुपये में सौदा किया था और केशव प्रसाद मौर्य के कहने पर ही यह आयोजन कराया गया था। हालांकि, इस कथित सौदे की पुष्टि नहीं हुई है।
ब्राह्मण समाज को सावधान रहने की आवश्यकता है। समाज के नाम पर राजनीति करने वाले कथित दलालों और संगठनों से सतर्क रहिए। किसी को भी समाज की भावनाओं और स्वाभिमान का सौदा करने का अधिकार नहीं है।
समाज के नाम पर सम्मेलन हो और समाज के ही युवा की आवाज दबाने के लिए थप्पड़ मारने का आरोप लगे, तो ऐसे आयोजनों और उनके आयोजकों से सवाल पूछना जरूरी है।
इक सिगरेट जब जलती है
तो वो धीरे धीरे सुलगती है
हमारे खयालो के साथ
वो लगातार जलती रहती है
और उसे कोई उम्मीद भी नहीं रहती
क्योंकि उसका काम ही जलना है
हम सिगरेट नहीं
बस जज़्बात जलाते है
दिल में दबे अरमान को
खाक में मिलाते है
या फिर उसी राख से जुड़ कर
एक नया आसमान बनाते है
शाम का वक्त हो
और शराब न हो
किसी आदमी का वक्त
इतना खराब तो न हो
शराब के साथ
शबाब और कबाब की जरूरत
तो फ़रेबियो को पड़ती है
वरना शराब तो एक मर्द को
खुद से जोड़े हुए रखती है
न पियेगा तो ग़म कैसे भुलायेगा
जो आज नहीं भूला
तो वो कल कैसे फिर से जी पाएगा
ये भूरा है,ये अपने बाकी 2 भाइयों के साथ मेरे प्लांट पर रहता है,इसके बाकी दोनों भाई कल्लू और चितकबरा भी है,इसका एक और भाई भी साथ में आया था,पर वो गायब हो गया,इसको ताज़ी रोटी खाना ही पसंद है,अपने भाइयों में सबसे एक्टिव यही है,हमे देखते ही लपक के आता है डांस करते हुए 🙂
जाने क्यों कभी कभी ये मन बावरा हो जाता है
तबियत अजीब सी हो जाती है
और दिल बंजारा हो जाता है
बस यूं लगता है कि कही भी चल दो
पीछे मुड़ कर न देखो
और पुरानी बातों को वही छोड़ दो
किसी अनजान सफर पर
एक ऐसी डगर पर
जिसकी न ही कोई मंजिल हो
फिर चाहे वो सफर
कितना भी अनजान क्यों न हो











