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पंजाब पुलिस पहुंच गई Ethiopia विदेश में छिपे 5 लाख के इनामी गैंगस्टर को पकड़कर भारत ले आई
पंजाब पुलिस ने ऐसा ऑपरेशन चलाया कि विदेश में छिपकर बैठे गैंगस्टर को भी आखिरकार भारत लौटना पड़ा
गुरविंदर सिंह उर्फ अफरीदी जिसे पंजाब पुलिस Ethiopia से भारत लेकर आई है
इस ऑपरेशन....१/२
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💖 सारी रोशनी दीयों से नहीं आती
कुछ रोशनी उस प्यार से आती है, जो हम देते और पाते हैं। ❤️
उस दयालुता से, जो हम दूसरों के साथ बाँटते हैं, और उन छोटे-छोटे खूबसूरत पलों से, जो जीवन को खास बनाते हैं। 🚩✅
ईश्वर करे आपका जीवन हमेशा प्रेम, खुशियों और सकारात्मकता के उस प्रकाश से जगमगाता रहे, जो वास्तव में मायने रखता है। 🌸
आपको एवं आपके समस्त परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🪔🙏
🎆🙏 शुभ दीपावली 🎉🙏
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🪔 *आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!* ❤️
*आपकी जिंदगी खुशियों और मुस्कान से जगमगाती रहे। 😍* ✨
शुभ दीपावली! 🎆
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आज मेरी बरसी है। मुझे आज तक नहीं समझ आया मेरे चले जाने से क्या कुछ बदला।?
जबकि बहुत सारे वादे किए गए थे कि इन दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया जाए बहुत सी मुश्किलें हल हो जाएंगी।
हालांकि मैं इन बातों को अब याद नहीं दिलाना चाहता हूं लेकिन मुझे एक बात का दुख है कि
मेरे अपने सोशल मीडिया के लोग भी मुझे आज याद नहीं कर रहे हैं हो सकता है उनका लगाव डॉलर से हो गया हो।
आज्ञाकारी-
बड़ा भाई ₹1000
छोटा भाई ₹500
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मनपसंद सब्जी नहीं बनी तो खूनी विवाद में बदल गया मामला! 😳
गुजरात के अहमदाबाद के नरोडा इलाके में खाने को लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी ने कथित तौर पर सब्जी काटने वाले चाकू से पति पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
मृतक की पहचान सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी दिलीपभाई सोमाजी खराड़ी के रूप में हुई है।
हैरानी की बात है कि हमले के बाद पत्नी निर्मला खुद ही पति को अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आखिर छोटी-छोटी बातों पर इंसान इतना हिंसक कैसे हो जाता है?
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ये हैं बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन, जिन्होंने अपनी बहन नूपुर सेनन और मां गीता सेनन के साथ मुंबई में प्रॉपर्टी के कारोबार से शानदार कमाई की है।
दरअसल, कृति सेनन की फैमिली ने मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित Raheja Classique प्रोजेक्ट में कुल 4 अपार्टमेंट खरीदे थे।
इनमें से दो अपार्टमेंट उनकी मां ने साल 2013 में करीब 1.40 करोड़ रुपये में खरीदे थे, जबकि बाकी दो अपार्टमेंट कृति और उनकी बहन नूपुर ने साल 2017 में करीब 2.90 करोड़ रुपये में खरीदे थे...1/2
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दीयों से रोशनी लेना अच्छा लगता है, लेकिन उसी दीये का बचा तेल किसी गरीब के घर जाए तो परेशानी क्यों? 😔
अयोध्या में लाखों दीये जलने के बाद बचा हुआ तेल अगर किसी गरीब के घर का चूल्हा जला दे या किसी भूखे को थोड़ी राहत दे दे, तो इसमें बुराई क्या है?
दुख की बात है कि ऐसे लोगों को मदद और सम्मान देने के बजाय 'हट-हट, भाग जा यहां से' कहकर अपमानित किया जाता है।
त्योहार की असली खूबसूरती सिर्फ रोशनी में नहीं, बल्कि इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद करने में भी है।
क्या गरीबों को बचा हुआ तेल इकट्ठा करने का भी सम्मान नहीं मिलना चाहिए?
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अयोध्या दीपोत्सव की असली भव्यता और दिव्यता तो ये गरीब दिखा रहे हैं।
लाखों दीपक जलाने की रौनक के बीच गरीब बच्चे जले और बचे हुए दीपकों से तेल इकट्ठा कर रहे हैं। नंगे पैर, साधारण कपड़ों में ये बच्चे जार और बोतलों से तेल निकाल-भर रहे हैं।
एक तरफ भव्य उत्सव, दूसरी तरफ ये बच्चे बचे तेल को अपने घर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
#Ayodhya
#Deepotsav
#ViralVideo #DiwaliReality
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पहले नजारा देखकर लगेगा कि सब कुछ सामान्य है...
लेकिन अगले ही पल जो कारनामा हुआ उसे देखकर
आपकी सांसें अटक जाएंगी
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कर्नाटक के लोगों ने राहत की उम्मीद में वोट दिया था, लेकिन अब उनके हिस्से में बढ़ते खर्च और कम होती सुविधाएं आ रही हैं?
चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में आम लोगों से कई बड़े वादे किए थे।
गृह ज्योति: हर घर को हर महीने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली।
शक्ति योजना: महिलाओं के लिए सरकारी KSRTC और BMTC बसों में मुफ्त सफर।
लेकिन अब 6 नवंबर 2026 से इन सुविधाओं पर रोक लगने की बात सामने आई है। और परेशानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है।
बसों का किराया भी बढ़ा दिया गया है, जिससे रोजाना सफर करने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
मुफ्त बिजली से मिलने वाली राहत भी अब खत्म हो रही है।
दूध के दाम भी बढ़ गए हैं, यानी रोजमर्रा की जरूरतें भी महंगी होती जा रही हैं।
जरा सोचिए, पहले से ही घर का खर्च संभालने में परेशान एक आम परिवार आखिर कहां-कहां से पैसे बचाएगा?
बिजली का बिल, बस का किराया, दूध और दूसरी जरूरी चीजें... सब पर खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में अगर एक तरफ महंगाई बढ़े और दूसरी तरफ चुनाव में किए गए वादों का फायदा भी छिन जाए, तो आम आदमी अपना घर कैसे चलाएगा?
चुनाव के समय किए गए वादे सिर्फ वोट मांगने के नारे नहीं होते। लोग उन पर भरोसा करके अपना फैसला लेते हैं।
अगर सरकार सत्ता में आने के बाद लोगों को दी गई राहत वापस ले लेती है और ऊपर से कीमतें भी बढ़ा देती है, तो इस आर्थिक बोझ की जिम्मेदारी कौन लेगा?
कर्नाटक की जनता को बहाने नहीं, जवाब चाहिए। आखिर आम आदमी कब तक इस बढ़ते बोझ को झेलेगा?
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एक दिन 1.5M रिच मिलती है और एक दिन 2 लाख l ऐसे में कैसे काम चलेगा l
@grok वापस कर दो रिच यार मजा नहीं आ रहा है चलाने में l



























