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Official Twitter Account of the Legendery Poet/Writer Kaifi Azmi

India
Joined May 2012
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मैं ये सोच कर उस के दर से उठा था कि वो रोक लेगी मना लेगी मुझको कदम ऐसे अंदाज से उठ रहे थे कि वो आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको हवाओं मे लहराता आता था दामन कि दामन पकड़ के बिठा लेगी मुझको... - पशेमानी #KaifiAzmi
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और फ़िर कृष्ण ने अर्जुन से कहा- न कोई भाई, न बेटा, न भतीजा, न गुरु एक ही शक्ल उभरती है हर आईने में आत्मा मरती नहीं, जिस्म बदल लेती है धड़कन इस सीने की जा छुपती है उस सीने में... - फ़र्ज़ #KaifiAzmi #HappyJanmashtami
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कोई देता है दर्द-ए-दिल पे मुसलसल आवाज़ और फिर अपनी ही आवाज़ से घबराता है अपने बदले हुए अंदाज़ का एहसास नहीं मेरे बहके हुए अंदाज़ से घबराता है... - दावत #KaifiAzmi
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जिस्म ही जिस्म हैं, कफ़न ही कफ़न बात सुनते न सर झुकाते हैं अम्न की ख़ैर, कोतवाल की ख़ैर मुर्दे क़ब्रों से निकले आते हैं कोई अपना न कोई बेगाना आज की रात हम को सोने दो... - आख़िरी रात #kaifiAzmi
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उड़ जा उड़ जा प्यासे भँवरे, रस ना मिलेगा ख़ारों में कागज़ के फूल जहाँ खिलते हैं, बैठ ना उन गुलज़ारो में नादान तमन्ना रेती में, उम्मीद की कश्ती खेती है इक हाथ से देती है दुनिया, सौ हाथों से लेती है ये खेल है कब से जारी बिछड़े सभी, बिछड़े सभी बारी बारी... #KaifiAzmi
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इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क यूँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े... - #KaifiAzmi
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On Kaifi Azmi's centenary year, Garm Hava writer Shama Zaidi remembers him mumbaimirror.indiatimes.com/…
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Kaifi Azmi remembered with postal tribute printweek.in/article/kaifi-a…
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Kaifi Azmi - کیفی retweeted
The ghazal #KaifiAzmi is reciting in this clip was written by him when he was just 11 years old
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नहीं मोहब्बत की कोई क़ीमत जो कोई क़ीमत अदा करोगी वफ़ा की फ़ुर्सत न देगी दुनिया हज़ार अज़्म-ए-वफ़ा करोगी मुझे बहलने दो रंज-ओ-ग़म से सहारे कब तक दिया करोगी जुनूँ को इतना न गुदगुदाओ, पकड़ लूँ दामन तो क्या करोगी क़रीब बढ़ती ही आ रही हो ये ख़्वाब कैसा दिखा रही हो... - तसव्वुर
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तुझे मिली रौशनी मुझको अँधेरा सारा जहाँ है बदगुमां कोई नहीं मेरा यहाँ तुझे मिली रौशनी मुझको अँधेरा... #RIP #AshaBhosle #KaifiAzmi
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