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उनकी निगाह-ए-तल्ख़ तबस्सुम में ढल गई
तज़दीद-ए-ऐतबार की सूरत निकल गई
वो मुस्कुरा के हाल मेरा पूछने लगे
ऐसा लगा कि आई हुई मौत टल गई
इक अजनबी ने उस को पुकारा था एक बार
फिर यूँ हुआ फ़कीर की क़िस्मत बदल गई
इक अधखिले कमल को जो इक आग ने छुआ
दो ज़िस्म आसमाँ में उड़े रुत बदल गई
~हरीश
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#मेरी_वृंदावन_यात्रा
ये हवा कैसे उड़ा ले गई आँचल मेरा
यूँ सताने की तो आदत मिरे घनश्याम की थी।
#परवीन_शाकिर
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टक-टकी बाँध के मैं देख रहा हूँ जिस को
ये भी हो सकता है वो सामने बैठा ही न हो
#ज़फ़र_इक़बाल
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अपने भारत को सजाएँ मौला
प्यार के दीप जलाएँ मौला
धन को तरसे न कोई धनतेरस
साल भर धन को लुटाएँ मौला
जिनकी कुटिया में अंधेरा है बहुत
रौशनी में वह नहाएँ मौला
हमभी शामिल हों ख़ुशी में सब की
हमभी दीवाली मनाएँ मौला
मेरे भारत को ‘मुनव्वर’ कर दे
राम बनवास से आएँ मौला
तहसीन मुनव्वर
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हमीं लोगों ने बचा रक्खा है रातों का वजूद
शहर वाले तो अंधेरा नहीं होने देते
#अशरफ़_जहाँगीर
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तकब्बुर का सफ़ीना ऐ सितमगर डूब जाता है,
अना के एक क़तरे में समुंदर डूब जाता है !!
सदा है सरफ़राज़ी ख़ाकसारी को ज़माने में,
कि तिनका तैरता रहता है पत्थर डूब जाता है !!
सफ़र राह-ए-मोहब्बत का नहीं आसाँ मिरे हमदम
ये ऐसा बहर है जिस में शनावर डूब जाता है !!
~ मो. नसरूल्लाह नस्र
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इश्क़ में इतना असर हो ये ज़रूरी तो नहीं
उन को अब मेरी ख़बर हो ये ज़रूरी तो नहीं
अश्क भी मेरे जला सकते हैं दामन उन का
सिर्फ़ आहों में असर हो ये ज़रूरी तो नहीं
वक़्त आता है तो फूलों में बसर होती है
उम्र काँटों पे बसर हो ये ज़रूरी तो नहीं।
#अनवर_निज़ामी_जबलपुरी
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उस वक़्त जब तिलिस्म-ए-फ़लक टूटने को था
ऐसा हुआ कि मुझ को बुलाने लगी ज़मीं
#मुज़फ़्फ़र_हनफ़ी
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मेरी ही तस्वीर में होंटों पर ताला ख़ामोशी का,
हाए मुसव्विर ने खींचा है क्या नक़्शा ख़ामोशी का !!
हम दोनों का अह्द हुआ था एक ज़बान ही बोलेंगे,
तुम बोलो क्या मतलब समझूँ यक-तरफ़ा ख़ामोशी का !!
इक दरवेश से ले आया हूँ दे कर शोर का काठ कबाड़,
हिज्र की लकड़ी चुप की हांडी और चूल्हा ख़ामोशी का !!
~ दानिश अज़ीज़
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तअल्लुक़ टूटने का ग़म उठाना भी ज़रूरी था,
ज़रूरी तुम भी थे लेकिन ज़माना भी ज़रूरी था !!
तेरी आँखों की बेचैनी मिरी ज़ंजीर थी लेकिन,
खड़ी थी रेल-गाड़ी और जाना भी ज़रूरी था !!
अगर मैं फ़र्ज़ था तो फिर निभाया क्यों नहीं तुम ने,
अगर मैं क़र्ज़ था तो फिर चुकाना भी ज़रूरी था !!
~ कमल हातवी
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शायद कोई तराश कर किस्मत सवाँर दे
ये सोच कर हम उम्र भर, पत्थर बने रहे
#Unknown
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दवा से हल न हुआ तो दुआ पे छोड़ दिया
तिरा मोआ'मला हम ने ख़ुदा पे छोड़ दिया
#ख़ुर्रम_आफ़ाक़
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सफ़र करने लगा हूं बैठे बैठे
तुम्हारा नाम मंज़िल रख लिया है
#खुर्रम_आफ़ाक़
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बिछुआ बजे आधी रात, नयन निंदिया बिन तरसे…
या तो बिछुआ रूठ गया है या गोरी का पाँव नया है…
या दैवी सौगात, नयन निंदिया बिन तरसे…
#ठुमरी #पूर्वांचल #काशी
@aniltyagi11 @H_kumar1 @Arif61916342
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All of us are on a spiritual journey to learn that we are souls, not bodies, that only love is real and eternal, and that our consciousness continues after the death of the physical body. We grieve our lost loved ones, yet we are always being reunited. We are never alone.
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जो रन्जिशें थीं उन्हें बरक़रार रहने दिया
गले मिले भी तो दिल में ग़ुबार रहने दिया
गली के मोड़ से आवाज दे के लौट आए
तमाम रात उसे बेक़रार रहने दिया
- शकील आज़मी
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हौसला हो तो बात बन जाए
हौसला ही नहीं मगर मुझ में
#रहमान_फ़ारिस
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बेचैनी, बेक़रारी का सबब कुछ भी हो.!
पर राहत, क़रार, सुकून तुम ही हो...!!
#bina
@binakapur
#Sabab #Shair
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इक ऐसे शख़्स को तकना हमारा,
नहीं जो नाम तक लेता हमारा !!
तुम्हारे साथ रहते क्या ख़बर हो,
कहाँ पर लग गया कितना हमारा !!
सभी के सामने चूमा था उस ने,
बहुत मशहूर है क़िस्सा हमारा !!
~ मुक़ील बुख़ारी
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मुझे अब आ गए हैं नफ़रतों के बीज बोने
सो मेरा हक़ ये बनता है कि सरदारी करूँगा
#अब्दुर्राहमान_वासिफ़










