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तुम्हारे पास लफ़्ज़ थे
सोच थी... आवाज़ थी...
तुमनें मौन रहने के लिए...
... कितना संघर्ष किया होगा..!!!
#नीलम
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ये जो शाख़ें धूप को ज़मीं तक आने नहीं देतीं,
काश इंसान भी किसी के हिस्से की तकलीफ़ रोक पाता
🥀
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सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में,
कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी,
मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी,
कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी,
चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही,
भले ही दिवाली यहाँ रोज आए
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
गोपालदास नीरज
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सुनो आपसे कुछ कहना है -
सूरज ने पहाड़ों के पीछे से झाँकना शुरू किया है,
आकाश में हल्का सुनहरा रंग बिखरने लगा है,
गली में साइकिल की घंटी कहीं से सुनाई दी है,
और घर में सुबह की चहल-पहल लौट आई है।
रात में जो बातें उलझी हुई लग रही थीं,
वो भी अब धूप में सीधी सी लगने लगी हैं,
किसी के बिना कहे ही दिल हल्का हो गया है,
और तन्हाई का एहसास कम हो गया है।
चलो आज दिन को धीरे-धीरे अपनाते हैं,
किसी पुरानी ख़ुशी को फ़िर से दोहराते हैं,
जो अधूरा था उसे आज थोड़ा आगे बढ़ाते हैं,
बस इस पल को शुक्रिया कह कर अपनाते हैं।
सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो 🙏🪴🙏
#अशोक_मसरूफ़
Pic credit -pinterest
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Replying to @mK2yKgwbGz2R2Aq
जागते जागते इक उम्र कटी हो जैसे...
जान बाक़ी है मगर साँस रुकी हो जैसे...
~ फ़ैज़ अनवर
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इस रोशनी में
थोड़ा-सा हिस्सा उसका भी है
जिसने चाक पर गीली मिट्टी रखकर
आकार दिया है इस दीपक को...
इस रोशनी में
थोड़ा-सा हिस्सा उसका भी है
जिसने उगाया है कपास
तुम्हारी बाती के लिए...
थोड़ा-सा हिस्सा उसका भी
जिसके पसीने से बना है तेल
इस रोशनी में
थोड़ा-सा हिस्सा
उस अँधेरे का भी है
जो दीये के नीचे...
पसरा है चुपचाप...
~ मणि मोहन
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सपनों को पंख चाहिए
और ज़िम्मेदारियों को ज़मीन...
ज़िंदगी इन दोनों के बीच की उड़ान है...!!
~ योगेश सिंह
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हर सुबह सूरज का निकलना ही उजाला नहीं होता,
किसी अपने का ख़्याल आना भी कम निराला नहीं होता।
ज़िंदगी ख़ूबसूरत है छोटी-छोटी खुशियों से,
हर दिन मुस्कुराने का कोई न कोई बहाना होना चाहिए।
सुप्रभात 🙏🌼
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तेरे साथ हर त्योहार खास लगता है,
तेरा हाथ हो हाथों में तो हर पल पास लगता है.
दीयों की रोशनी भी फीकी पड़ जाती है,
जब तेरे चेहरे पर मुस्कान नज़र आती है...
इस छोटी दिवाली बस इतनी-सी दुआ है,
हर जन्म में तू मिले,
क्योंकि तू ही मेरी दुनिया है।
हैप्पी दिवाली
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कभी-कभी यूँ ही आँखें नम हो जाती हैं,
कुछ बूँदें मेरी पलकों से उतरकर
मेरे चेहरे को छू जाती हैं...
और लगता है जैसे कुछ तो हुआ है,
कोई भूली हुई याद दस्तक दे गई है,
या दिल के किसी कोने में
कोई अनकहा एहसास फिर से जाग गया है...
न कोई शिकायत होती है,
न कोई वजह समझ आती है,
बस कभी-कभी यूँ ही
आँखें नम हो जाती हैं...
_____डेज़ी🌼
सपनों को पंख चाहिए
और ज़िम्मेदारियों को ज़मीन...
ज़िंदगी इन दोनों के बीच की उड़ान है...!!
~ योगेश सिंह
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इतनी मुश्किलों के बाद भी हार क्यों नहीं मानते ?
क्योंकि हार मान लेना आसान है, लेकिन अपने वजूद को साबित करना आसान नहीं।
मुश्किलें रास्ता रोक सकती हैं, हौसला नहीं।🔥
हालात पंखों को घायल कर सकते हैं, उड़ने की चाह को नहीं !🤞🏻
#Mindset #Motivation 💪
#NeverGiveUp


























