अब तक सहा अब न सहूंगा
किस रामकथा में किस राम के भाव ये रहे हैं? क्या सह लिया और क्या सहना नहीं चाहते? दशरथ का निर्णय?
कैकेयी का वचन? अपने राज्यसिंहासन पर भरत का डाका?
बेनेगल की फिल्म में जमींदार की खिड़की का कांच पत्थर मार कर तोड़ता बच्चा और बैकग्राउंड में ये गाना, फिट है?
श्याम सुरैया की एक बहुत ही बड़ी म्यूजिकल हिट फिल्म थी दिल्लगी।
गीत शकील बदायूँनी ने लिखे थे और संगीत लीजेंड नौशाद साहब का था।
उस फिल्म का गाना,तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी,इस साँस आस बांसुरी रागिनी की टटपुंजियाँ भाव हीन तुकबंदी से लाख गुना बेहतर था।
गुनगुनाइए, पता चल जाएगा।
जब मेरे दोस्त ने 10 वी क्लास में अपनी गर्लफ्रेंड को लेटर लिखा था, उसके लिरिक्स भी इससे बेहतर थे।😅
@niteshtiwari22 इतने बेहतरीन डायरेक्टर हो आप, दंगल जैसी मास्टरपीस बनाई है आपने। आपको ये बात समझ नहीं आई, किसी विदूषक के मसखरी करने और पौराणिक कथाओं के संवाद लिखने में फ़र्क़ होता है। ये आपने भी पढ़े होंगे, इसमें कुछ भी रामायण के स्तर का लग रहा है ? Chat GPT से मैं अगर अभी बोलूँ, राम सीता के धनुष यज्ञ और प्रथम मिलन पर इससे बहुत अच्छा लिख कर दे देगा। 😇 👇👇
हल्दी की रस्म देख ली,अब आगे
- राम,आज करवा चौथ है।
- सीते,इस वन में क्या उपहार दूं?
- प्रिय,वो देखो,स्वर्ण मृग। कितना अनोखा है(इठला कर बुंदेली टच में जिद)मुझे ये ही चेइए।
- सीते,काये जिद्द कर्री।
- नहीं नाथ,करवा चौथ का व्रत इसी स्वर्ण मृग के साथ मनाऊंगी।
और हां, छलनी भी लानी है।
बहुत जल्द देखने मिलेगा।
जिस हिसाब से रामायण पर फिल्में बन रही है और हनुमान का बिना मूंछ के दाढ़ी के साथ वाला गेट अप हिंदुओं के गले उतार चुके हैं।
तो क्यों नजर नहीं आएंगे हनुमान पेड़ नीचे बैठे किसी चबूतरे पर, तू ही मौला तू ही अली, तुझे पुकारे बजरंग बली की खंजडी बजाते?
ए आर रहमान जैसे खुले आम के हिंदू हेटर को रामायण जैसे धार्मिक ग्रन्थ पर बनी कहानी का हिस्सा बनाओगे तो वो अपनी उस दीनी मानसिकता का प्रदर्शन दिखाएगा ही, जिसमें हिंदुओं के कुएं में थूंक के पूरे गांव के गांव को भ्रष्ट कर के कन्वर्ट करने की मानसिकता रहती।
कव्वाली पर ही रुक गया।।
वरना रामायण में अल्ला ही मौला अली अली भी डाल सकता था संगीत के नाम पर ये।
तीन बार कहा खड़गे जी ने, मोदी का बाप भी जायेगा मोदी का बाप भी जायेगा मोदी का बाप भी जायेगा।
शाप की मुद्रा में,भृकुटियां चढ़ा कोप के साथ।
सौभाग्य से उनके आस पास जल नहीं था और उनके जटा भी नहीं थी नहीं तो जटा का एक केश उखाड़ कर वहीं एक कृत्या प्रगट कर तत्क्षण प्रलय का आदेश दे देते।
कांग्रेस हो सकता है खड़गे जी द्वारा दिए गए,मोदी के बाप को भी जाना होगा, बयान को आजकल के जेन जी भाषा बताकर उसका बचाव करे।
जंतर मंतर पर प्रधानमंत्री को दी गई गालियों को सीजेपी कांग्रेस और लेफ्ट लिब मीडिया ने जेन जी का एक्सप्रेशन बताया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान अशोभनी य है।
खड़गे का बड़प्पन इसी में है कि वे अपने बयान पर खेद प्रगट करें कि सभा में टोकाटोकी से आवेश में आकर उन्होंने अप्रिय टिप्पणी कर दी।
सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और राजनीतिक शब्द शुचिता बनाये रखने पर उनका कद बढ़ा दिखेगा।
Let a political journey begin with lies and drama.
How Raihan and Priyanka Gandhi did Drama!
- Raihan booked exhibition hall saying theme will be nature, wildlife, artwork, sculptures, etc.
- But there were no such pictures.
- Raihan never mentioned it was political exhibition
- when they cancelled event for non-compliance, Vadras started playing victim
स्टीफन ज़्विग का कथा साहित्य अतुलनीय है।
अगर अंग्रेजी की पांच सर्वश्रेष्ठ कहानियां चुनी जानी हो तो चेस स्टोरी और लेटर फ्रॉम अन अननोन वूमेन निश्चित ही चुनी जायेंगी।
संवेदनशील,एकाकीपन,मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के साथ जिस मानवीय करुणा को उकेरा है,विलक्षण है।
ज़्विग शब्दशः पठनीय है।
"मैं, जो बहुत बेसब्र हूँ, उनसे पहले ही जा रहा हूँ।"
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22 फरवरी 1942 की रात ब्राज़ील के एक शांत पहाड़ी कस्बे में जब स्टीफन ज़्विग और उनकी पत्नी लोटे ने नींद की गोलियों का ओवरडोज़ लिया तब वो अपने ज़हन में बहुत हद तक सारे सवालों से मुक्त थे। उस रात बीसवीं सदी के उस पूरे विचार की मौत हो गई थी जिसने यूरोप को कला, दर्शन और उदारता का केंद्र माना था।
ज़्विग को शायद आप में से कुछ ने पढ़ा हो, कुछ ने मेरी तरह देर से खोजा हो। मुझे उनका नाम पहली बार पता चला था जब एक शानदार फिल्म खत्म हुई और अंत में डायरेक्टर ने उन्हें याद करते हुए कुछ लाइनें लिखीं।
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ज़्विग विश्वयुद्धों के दौर में दुनिया के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले लेखक थे। वियना के एक संपन्न यहूदी परिवार में पले-बढ़े ज़्विग की आँखों ने उस यूरोप को देखा था जो बिना पासपोर्ट की खुली सीमाओं, वियना के मशहूर कैफ़े-हाउसों में चलने वाले दार्शनिक विमर्शों और एक साझा महाद्वीपीय सभ्यता का सपना जी रहा था। ज़्विग ने अपनी आत्मकथा 'द वर्ल्ड ऑफ यस्टरडे' में इसे 'सुरक्षा का स्वर्णिम युग' कहा था। विडंबना देखिए इसी आत्मकथा की कॉपी प्रकाशक को डाक से भेजने के ठीक 24 घंटे बाद ज़्विग ने अपनी पत्नी का हाथ थामे यह दुनिया छोड़ दी।
फ्रायड, गुस्ताव महलर और रिल्के जैसे दिग्गजों के समकालीन ज़्विग 1920-30 के दशक में जर्मन भाषियों और पूरे यूरोप में एक सेलिब्रिटी की तरह पढ़े जा रहे थे। 'Beware of Pity' और 'Letter from an Unknown Woman' जैसी उनकी किताबों के अनुवाद दुनिया भर में हिट थे। मगर समय बदला। 1914 के पहले विश्व युद्ध और फिर 1930 के दशक में उभरे नाज़ीवाद ने उस परिष्कृत दुनिया को चंद बरसों में रौंद डाला।
जिस वियना को ज़्विग अपनी आत्मा मानते थे वहाँ उनकी किताबें जलाई जाने लगीं। 10 मई 1933 को हिटलर के प्रोपेगैंडा मंत्री गोयबल्स के आदेश पर उन्मादी नाज़ी छात्रों ने चौराहों पर उन किताबों को जलाया जिन्हें वे 'अन-जर्मन' मानते थे। इसमें फ्रायड, मार्क्स, आइंस्टीन और थॉमस मान के साथ ज़्विग की किताबों भी थीं। उनकी किताबों की छपाई पर पाबंदी लग गई। प्रकाशकों पर दबाव बनाकर अनुबंध रद्द कराए गए।
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अराजनैतिक स्वभाव के ज़्विग पहले विश्व युद्ध के बाद से वियना छोड़कर साल्ज़बर्ग में एक पहाड़ी पर बने अपने सुंदर घर में रहने चले गए थे। 1934 के फरवरी में ऑस्ट्रियाई गृहयुद्ध के दौरान एक दिन पुलिस ज़्विग के घर में घुस आई। झूठा शक जताया गया कि उन्होंने घर में वामपंथी मिलिशिया के हथियार छुपा रखे हैं। तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन एक विश्वप्रसिद्ध, शांतिप्रिय लेखक के घर में पुलिस का इस तरह अपमानजनक ढंग से घुसना यह बता गया कि अब मुल्क में न कानून का राज बचा है, न नागरिक गरिमा। आहत होकर ज़्विग लंदन चले गए। 1938 में जब हिटलर ने ऑस्ट्रिया का विलय किया तो ज़्विग का पासपोर्ट रद्द हो गया। वो स्टेटलेस हो गए। ब्रिटेन में रिफ्यूजी कार्ड लेना पड़ा। युद्ध छिड़ते ही जर्मनों पर शक़ गहराने लगा तो वे पहले अमेरिका और फिर 1941 में ब्राज़ील में शरण पाए।
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फरवरी 1942 में नाज़ी अजेय लग रहे थे। 60 साल के ज़्विग की हिम्मत अब टूटने लगी थी।
22 फरवरी 1942 को रविवार था। पेट्रोपोलिस के अपने छोटे से किराए के बंगले में ज़्विग ने आत्मीयजनों को खत लिखने के बा पुर्तगाली में “घोषणा” शब्द लिखकर जर्मन में अपना अंतिम सुसाइड नोट टेबल के बीचों-बीच रखा।
रात करीब 9 से 10 बजे के बीच ज़्विग और लोटे ने अपने बेडरूम का दरवाज़ा भीतर से बंद कर लिया। लंबे वक्त से जमा की गई नींद की गोलियों का घोल पहले 60 साल के ज़्विग ने पिया और अचेत हो गए। फिर 33 साल की लोटे ने भी उतनी ही खुराक ले ली। रिपोर्ट कहती हैं कि ज़्विग ने लोटे से जीने का आग्रह किया था, मगर वे ज़्विग के बिना इस उजड़ी दुनिया में रहने को तैयार नहीं थीं।
अगली सुबह नाश्ते के लिए जब नौकरानी ने दरवाज़ा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। सुबह दस बजे तक कोई हलचल न होने पर पुलिस बुलाई गई और दरवाज़ा तोड़ा गया।
अंदर संघर्ष या तड़प का कोई निशान नहीं था। हर चीज़ अपनी जगह पर करीने से रखी थी। ज़्विग जा चुके थे। उनके लिखे नोट की कुछ लाइनें साफ चमक रही थीं- मैं अपने मित्रों को सलाम करता हूँ! काश वो आनेवाली भोर देख सकें! मैं, जो बेसब्र हूँ, पहले जा रहा हूँ।"
ज़्विग का जाना यह सबक छोड़ गया कि सभ्यताएँ और लोकतंत्र कोई अमर शिलालेख नहीं हैं जिन्हें कभी खरोंच न आए। जिस शिष्टाचार और आज़ादी को हम बहुत सहज मान बैठते हैं, अगर उनकी हिफ़ाज़त न की जाए तो वे नफ़रत के एक ही झोंके में तिनकों की तरह बिखर सकते हैं।अफसोस कि जिस भोर से पहले वो बेसब्र होकर चले गए, वो कुछ ही साल बाद आ गई थी।
#इतिइतिहास
(फोटो- ज़्विग का अंतिम नोट)
केंद्र में यूपीए की सरकार रहते गुजरात में मोदी वोट चोरी से 2007 और 12 में सरकार बनाते रहे। यहां तक कि मोदी दिल्ली में भी 2014 में सरकार बना ले गए
अब राहुल का सिर्फ यह कहना बाकी है कि 77 में जनता पार्टी और 89 में वीपी सिंह ने वोट चोरी से सरकार बनाई थी।
जनता कांग्रेस के साथ थी।
लीजेंड महाशय
मनुस्मति का रट्टा मार चुके हो?
ये मनुस्मति वाली सजा है।
गरीब नंगे भूखे शरणार्थियों को अपने देश में घुसने देने की कीमत अपने घर, दुकान को लुटते देखते हुए चुका रहे हैं फ्रेंच नागरिक,
यूरोप का सबसे लिबरल देश है फ़्रांस,
मैं फ़्रांस का प्रेसिडेंट होता तो सभी शरणर्थियों की नागरिकता खत्म करके अगले एक साल में सभी को उनके मूल देश वापस भेज देता,
बाक़ी कामगारों और अपने अपने काम के एक्सपर्ट विदेशी नागरिकों के लिए वर्क परमिट जारी करता,
और चालीस परसेंट इनकम टैक्स लगाता,
मामूली अपराध पर भी कड़ी सजा निर्धारित करता,
जब अंग्रेजी और पत्रकारिता की समझ बिल्कुल क्रांतिकारी हो।
प्रिंट मीडिया में ऐसे अनुवाद पर लोकल अखबार का डेस्क संपादक कान पकड़ कर बाहर कर देता।
फायदा सिर्फ इतना होगा कि संसद के शोर शराबे में कुछ डेसिबल की वृद्धि हो जायेगी।
आम जनता पर सांसदों के वेतन भत्ते कैंटीन पेंशन का बढ़ा खर्च लद जायेगा।पोस्टर नारे प्रचार के लिए लड़के लड़कियों में रोजगार सृजन होगा।
पेड कंटेंट क्रिएटर को रील काटने के लिए ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे।
बस
#Delimitation : मिशन 370 : सरकार डिलिमिटेशन बिल ला रही है । नंबर पूरे हो गए । बीती रात बात हो गई । ये नंबर और आगे भी जा सकता है ।
1. DMK ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है । लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को बुलाया गया है । पूरी उम्मीद है DMK Delimitation बिल को सपोर्ट करेगी । दलील एकदम साफ है: सरकार तैयार है तमिलनाडु के 39 की जगह 60 सांसद होंगे । DMK इस पर तैयार हो जाएगी ।
2. असम में एक लोकसभा सीट जीतने के बाद बीजेपी 241 और कांग्रेस 98 पर आ गई है । शिवसेना टूट चुकी है । TMC के बीस सांसद पक्के तौर पर बीजेपी के साथ हैं ।
3. कांग्रेस में सिर्फ़ एक लीडर हैं जो हर हाल में Delimitation बिल का विरोध करेंगे । इसलिए काँग्रेस से ज़्यादा बात करके कोई फ़ायदा नहीं है ।
4. समाजवादी पार्टी को DMK वाली दलील दी गई है, यूपी के लोकसभा सांसदों की संख्या अगर 80 से बढ़कर 120 होती है तो इसमें सपा को फायदा ही है , नुकसान कहां है ।
5. कांग्रेस का फॉर्मूला है , इस वक्त की 543 सीट में से 33% सीटें महिलाओं के लिए छोड़ दी जाए। ये प्रैक्टिकल नहीं लगता । 181 सांसद अपनी सीट छोड़ने वाले आइडिया पर तैयार होंगे क्या ? सपा के 37 सांसद हैं, क्या 12 सांसद अपनी सीट महिलाओं के लिए आसानी से छोड़ देंगे?
The Judge believes in films titles like Mera Vachan Geeta Ki Kasam and Pran Jaye Par Vachan Na Jaye
राहुल गांधी ने सरकार की नौकरशाही में दो सौ अफसरों में सेंध मार कर यह निकलवा पाए कि अमित शाह का बचपन का नाम पूनम था।
आदेश बता रहे हैं राहुल ने कमाल की रिसर्च टीम बना रखी है।
वैसे एक इंटरव्यू में अमित शाह बहुत पहले यह बात खुद ही बता चुके हैं।
कांग्रेस की क्या हालत है समझ सकते हैं
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं बल्कि अराजकता के जरिये रेजीम चेंज की आधिकारिक घोषणा के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, अंजुम बाबू।
ताऊ नजूमी ^ Tau Najumi^ retweeted
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Arundhati Roy wants Aazadi of Kashmir
Hawasi wants police to be removed for 15 mintues
And Modi Ji will do "Ab Hoga Tandav", and bury their dreams





























