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आजकल ये आम बात हो है है UP में,
लोगों ने इतनी गुंडागर्दी देखली है पिछले 10 सालों में कि उन्हें ये सब अब आम बात लगने लगी है।
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उत्तर प्रदेश में अब वे अधिकारी ही एसडीएम पोस्ट किए जा रहे हैं जो अपना आईडी पासवर्ड बीजेपी द्वारा डिप्यूटेड किसी कार्यकर्ता को दे देते हैं । ये बीजेपी का कार्यकर्ता वीआरसी के साथ बैठ कर सपा के वोटों को काटने और बीजेपी के वोटों को जोड़ने का कार्य कर रहे हैं । क्योंकि ओटीपी उसी आईडी पासवर्ड पर आता है जो बीजेपी के किसी व्यक्ति के पास है । वही ओके कर देता है । इस साजिश के तहत हर विधान सभा क्षेत्र में लगभग १० हज़ार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य रखा गया है । निर्वाचन आयोग इसका संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ दंडात्मक कार्यवाही करे ।@ECISVEEP
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Dekh lo en andhbhakto ki soch ,ye elections jitne ke liye kisi bhi had tak gir sakte hai.
Ab to mujhe shak ho raha hai ki jitne bhi attack hote hai ye bjp hi karvati hai.
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योगी आदित्यनाथ की ‘कथित’ लोकप्रियता की हालत देखिए।
2020 और 2026 में समाजवादी पार्टी के जीते हुए प्रत्याशियों को मिले वोट इसकी बानगी हैं।
2020 में इलाहाबाद झांसी स्नातक से मान सिंह यादव करीब 4300 से जीते थे, इस बार करीब 28 हजार से जीते हैं ।
2020 में लखनऊ से कांति सिंह लगभग 6400 से हारी थीं, इस बार 17 हजार से ऊपर वोटों जीती हैं।
2020 में बनारस से आशुतोष सिन्हा करीब 4000 से जीते थे, इस बार करीब 18000 से ऊपर।
2020 में आकाश अग्रवाल आगरा से करीब 2300 से जीते थे, इस बार करीब 4600 से।
2020 में लाल बिहारी यादव वाराणसी से 1000 वोटों से कम से जीते थे, इस बार करीब 5000 वोटों से।
2020 में गोरखपुर में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को करीब 2600 वोट मिले थे, इस बार करीब 9000।
ये आंधी तब है जब योगी आदित्यनाथ पर शासन सत्ता की हर चूलें हिलाकर, स्टेट मशीनरी का हर दुरूपयोग करके चुनावी लड़ाई लड़ने का संगीन आरोप है।
इसी से समझ लीजिए कि 7000 करोड़ के हवा-हवाई विज्ञापन की असलियत हकीकत में तिब्बत के दर्रे की निचाई को भी मात दे रही है!!
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उत्तर प्रदेश में बाबा नहीं बल्कि बंदूक का राज कायम हो चुका है।
यह रिटायर्ड फौजी हैं,
इसकी गुंडागर्दी की हद देखिये, मऊ में यूपी पुलिस के सामने ही एक युवक पर खुलेआम बंदूक तान दिया।
पिछले दिनों लखनऊ में ऋषभ शुक्ला नाम के एक व्यक्ति ने तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दिया।
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क्या फायदा रोजाना प्रचार पर 2 करोड़ 32 लाख रुपए खर्च करने का जब चुनाव ही नहीं जीत पा रहे हैं
जनता अब जागरूक हो चुकी है वो नफ़रत की राजनीति से तंग आ चुकी है इसलिए वो बीजेपी के झूठे प्रचार में नहीं फँस रही है।
गोदी मीडिया पर पैसा मत फूंकिए योगी जी जनता अब गोदी मीडिया को नहीं देखती
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आशुतोष यादव: 1474 अंक
सिखा सिंह: 1471 अंक
फिर भी गोल्ड मेडल शिखा सिंह को दिया गया, समाजवादियों की लड़ाई इसी जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ है
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सपा के लिए सुखद और ओवैसी के लिए दुखद खबर।
दो पैनकार्ड मामले में अबदुल्ला आजम और आजम खान को जमानत मिल गई है।
हालांकि आजम खान अभी जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे लेकिन अब्दुल्ला के बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
अब ओवैसी एंड कंपनी का वोट कटुआ वाला फंड भाजपा वापस कर लेगी।😂
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कॉलेजियम सिस्टम ने अभी 7 लोगो को जज बनाने की सिफारिश की है
इनमें से कितने SC ST OBC समाज से है और कौन कौन से है?
@grok बताओ
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वाराणसी में माननीय जी के आह्वाहन से गाजीपुर,बलिया,मऊ,आजमगढ़ और बनारस के हजारों कार्यकर्ता जुटे हुए हैं!
लेकिन बड़े नेता अपनी गाड़ियों में बैठकर खाना छाप रहे हैं और छोटे कार्यकर्ताओं को कोई पानी नहीं पूछ रहा!
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भाजपा वाले बनारस में IAS प्रांजल यादव को पक्षपाती होने का आरोप लगाकर मतगणना में बाधा डाल रहे जबकि IAS प्रांजल यादव स्नातक खंड के ऑब्जर्वर हैं ही नहीं। प्रांजल यादव तो वाराणसी शिक्षक खंड के ऑब्जर्वर हैं जिसकी मतगणना पूरी हो चुकी है। स्नातक के ऑब्जर्वर IAS जीएस प्रियदर्शी हैं।
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बड़ी ख़बर-
"प्रांजल यादव क्या आपके चुनाव के ऑब्जर्वर हैं?
जब वे स्नातक खंड के ऑब्जर्वर हैं ही नहीं हैं तो उनके खिलाफ धरना देकर काउंटिंग को क्यों रोका जा रहा है?”
बनारस के पत्रकारों और बनारस स्नातक खंड MLC से बीजेपी उम्मीदवार केदारनाथ सिंह के इस सवाल जवाब को सुनिए।
आप ये जानकर दंग रह जाएंगे कि बीजेपी उम्मीदवार को ये पता ही नहीं कि जिन प्रांजल यादव के खिलाफ वे बतौर ऑब्जर्वर गड़बड़ी करने के आरोप लगा रहे हैं,
वे स्नातक सीट के ऑब्जर्वर हैं भी या नहीं!
पत्रकार पूछते हैं कि प्रांजल यादव 4 राउंड तक संदिग्ध नहीं थे, फिर पांचवे राउंड में ऐसा क्या हो गया कि आपको उनकी भूमिका संदिग्ध कैसे लग गई?
केदारनाथ सिंह को कोई जवाब नहीं सूझता है।
पीछे से कुछ लोग जवाब देकर उन्हें prompt करते हैं, तब वे अपनी बात पूरी कर पाते हैं।
पत्रकार आगे पूछते हैं कि क्या प्रांजल यादव स्नातक सीट के ऑब्जवर हैं या नहीं, आपको पता है?
इसका भी कोई जवाब नहीं।
पत्रकार आगे पूछते हैं कि जब वे आपके ऑब्जर्वर हैं ही नहीं है। फिर किस बात का धरना?
जवाब में अप्पा-टप्पा-चप्पा।
सोचिए, इस तरह से रिकाउंटिंग करवाई जा रही है!!
गोरखपुर मात्र 307 वोटों से किसी तरह जीतने के बाद अब बनारस में भी उसी फार्मूले से लाज बचाई जा रही है?
गोरखपुर से राजीव यादव कैसे हारे हैं देखिए -
प्रथम वरीयता के सभी राउंड को मिलाकर 40811 वैध मतों में से BJP को केवल 11881 वोट मिले यानि 29%
लेकिन सिर्फ अंतिम राउंड के 1612 मतों में से 970 मत मिले यानि 60% , सीधे दोगुने से भी ज्यादा।
आखिर इतना बड़ा संयोग कैसे हो सकता है ?
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यूपी में MLC चुनाव में सपा को मिली जीत ने बाद पूर्व टेम्पू चालक ओपी राजभर ने कहा है कि
ये पढ़े लिखे लोगों का चुनाव था अभी विधानसभा चुनाव होगा तब आम लोग भी वोट देंगे तब देखते हैं।
यानी ओपी राजभर को भरोसा है कि उनको सिर्फ अनपढ़ वोट देते हैं।😂
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बड़ी खबर-
TGT- PGT परीक्षा में हुए बदलाव के खिलाफ प्रयागराज में आंदोलन कर रहे 150-200 छात्रों पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
एफआईआर में उन्हें उपद्रवी व अराजक बताया गया है।
आरोप है बैरिकेड तोड़कर शिक्षा निदेशालय में घुसने और तोड़फोड़ करने का।
ये वे छात्र हैं जिन्हें खुद योगी आदित्यनाथ ने पुरानी नियमावली से परीक्षा कराने पर पहल का आश्वासन दिया और फिर मुकर गए।
इन छात्रों ने यही बात उठा दी और शिक्षा निदेशालय में घुस गए।
अब योगी का नाम लेकर टिप्पणी की थी, सो एफआईआर तो होनी ही थी!
उत्तर प्रदेश में योगी का नाम लेने पर एफआईआर के स्वतःस्फूर्त ऑर्डर होते हैं क्या?
अपने हकों की मांग कर रहे छात्र बुरी तरह परेशान हैं!
सरकार अकबर, बाबर और औरंगज़ेब से लड़ रही है,
छात्र अपने भविष्य को लेकर हलकान हैं!!
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आज गोरखपुर में जो हुआ है वो नहीं होना चाहिए था।
जिसका लोगों को डर था वही हुआ और मात्र 276 वोटों से निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को हरवा दिया गया। सिर्फ 276 वोट अब आप सोचिए ये कोई अंतर है हार जीत का?
वैसे तो चुनाव में 1 वोट से हार जीत हो जाती है लेकिन जिस तरह से गोरखपुर में मतगणना हुई है जिस तरह के आरोप लगे हैं उसे देखते हुए कह सकते हैं कि
निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को हरवाया गया है और ध्रुव त्रिपाठी को 276 वोटों से जितवाया गया है।
पूरा सरकारी महकमा लगा हुआ था क्योंकि BJP के इज्जत का सवाल था और उसके लिए वो जो करना चाहते थे कर गए।
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पूरे देश में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए जिसका आंकड़ा ये है।
कर्नाटक - 4 सीट भाजपा+ जीत गया।
महाराष्ट्र - 3 सीट भाजपा+ और 2 सीट शरद पवार
बिहार - 5 सीट भाजपा+ 1 राजद 1 जनसुराज 1 निर्दल
यूपी - 6 सीट भाजपा 5 सीट सपा
यानी एक भी सीट कांग्रेस नहीं जीती इसलिए यूपी में सपा जो दे वो ले लो और सरकार में आ जाओ वोट अखिलेश यादव के नाम पर ही पड़ना है।
























