आपका संगठन तो यह काम पिछले 100 साल से लगातार कर रहा है।
अब क्या कोई नया ज्ञान बांट रहे हैं…..?
कितना बटेंगे …. हर कोई जाति पूछता है ,नाम से पहले जाति बताया जाता है !
मैं जिस नेतरहाट स्कूल में पढ़ा था वहाँ हम सब ३०-३२ थालियाँ साफ़ करते थे पता नहीं था किसकी थाली है । लेकिन आज समाज का मतलब समाज नहीं सबकी जाति हो गई है !
संत कुंभनदास जी के जीवन की घटना से जो लोकोक्ति उपजी थी वह आज अत्यंत ही सार्थक है: चले थे हरिभजन को ओटन लगे कपास !
कॉपी पेस्ट कर दिया लगता है….!!
लगता है भाजपा वाले panic में है…..!!
Rahul Gandhi Ji,
OPEN CHALLENGE. 🎤
Come to Parliament. Let’s debate!
1975: Your grandmother imposed the Emergency. Opposition jailed. Press gagged. Democracy strangled.
1984: Your father was Prime Minister when thousands of innocent Sikhs were massacred in Delhi. Congress still cannot escape that bloodstained legacy.
2014 🪷
2019 🪷
2024 🪷
Three consecutive terms.
The fourth is already your biggest nightmare.
Bhaagna mat!
📍 Parliament of India, New Delhi.
No visa required.
राहुल जी, क्यों बखिया उधेड़ रहे हो….? 😄
24 घंटे हो गए मोदी जी। मैंने आपको चैलेंज दिया है।
आप कहते हो कि opposition देशद्रोही है। किसी भी स्टेज पे आप जगह चुनिए, डिबेट कीजिए मेरे साथ।
देशद्रोही कौन है? विदेशी फोर्सेस का कनेक्शन किसका है? और किस प्रकार का कनेक्शन है? जल्दी से जल्दी कीजिए, डरिए मत।
दोनों मिलेंगे, मीडिया होगी, देश के युवा होंगे, टेबल होगी, एक साइड आप बैठोगे, एक साइड मैं बैठूंगा। जिसको आप जज बनाना चाहते हो, बना दो। मोहन भागवत जी को बिठा दो, चलो। और फिर डिबेट करते हैं।
सवाल उठेंगे फाइनेंशियल सिस्टम पर, फाइनेंशियल स्ट्रक्चर पर, US डील कैसे हुई, क्यों हुई, इतनी जल्दी क्यों हुई, सिर्फ आपने क्यों की, कैबिनेट को क्यों नहीं बताया, अडानी का केस बंद क्यों हुआ, Epstein - ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिसपे खुलकर डिस्कशन होगा।
आ जाइए, डरिए मत।
दूध का दूध, पानी का पानी कीजिए।
आप एलिगेशन लगाते हैं ना मेरे ऊपर, आ जाइए, सब साफ हो जाएगा।
बाकी चीजों पे आपने defamation केस लगा रखा है, शायद 45 defamation केस मेरे ऊपर हैं।
मगर इस डिबेट मामले पे, foreign कनेक्शन पे आप defamation नहीं लगा रहे हो। लगाइए ना, वहाँ भी डिस्कस करेंगे, खुल के। ये सब डिस्कस करते हैं, आइए।
हैप्पी दिवाली, मोदी जी।
It’s been 24 hours since I challenged you, Modi ji.
You say the Opposition is anti-national. Choose any stage, any venue, and debate me on this - Who is anti-national? Who has connections with foreign forces? And what is the nature of those connections?
Let’s do this as soon as possible. Daro mat!
We’ll both be there. The media will be there. The youth of this country will be there. There will be a table. You’ll sit on one side, I’ll sit on the other. You can appoint whoever you want as the judge. You can even make Mohan Bhagwat ji the judge.
There will be questions about the financial system, the financial structure, how the US deal happened, why it happened and why so quickly, why you made the deal alone and didn’t inform the Cabinet, why the Adani case was closed, Epstein - and many other issues. We’ll discuss all of them openly.
Let the truth come out. Let everything be crystal clear.
You make allegations against me, don’t you? Come forward. Everything will become clear.
You’ve filed defamation cases against me over other matters. I think there are around 45 defamation cases against me.
But on this issue of the debate, on the question of foreign connections, you haven’t filed a defamation case. Go ahead, file one. We’ll discuss that openly too.
Happy Diwali, Modi ji.
Cute. Enabling stops the second Trump quits treating every setback like a personal betrayal that needs a cheering section. Don’t hold your breath.
Matured debate ka Modi model: friendly anchor, pre-approved sawaal, zero press conference. Jo sawaal puchhe, woh "immature" ghoshit. 👏
#मोदी #Modi_Hai_To_Mumkin_Hai
Ladakh Sends Notice To Sonam Wangchuk's School, Asks It To 'Stop Classes'
ndtv.com/india-news/ladakh-s…
What happened to the Ambani-Modi “achhe din” partnership?
Is this what crony capitalism looks like when the bill finally arrives…?
indiatoday.in/india/story/an…
'24 घंटे हो गए, चैलेंज दिया है': खुली बहस को लेकर राहुल गांधी ने फिर पीएम मोदी को घेरा; बोले- आइए, डरिए मत……!!
amarujala.com/india-news/rah…
ऐसे ही लगे रहो घड़ा जल्दी भर जाएगा….!!
आज एबीवीपी न्यूज़ पर मनोज काका जो समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं उन्होंने गाली देते हुए मुझे संबोधित किया । ये पहली बार नहीं है । वे कई बार मुझ पर निजी टिप्पणी करते है जिसमे बेहूदा , गधा ऐसे शब्दों का प्रयोग रहता है । आज जब इस शब्द का प्रयोग किया तो मैंने जवाब में कहा कि ऐसे लोगों के लिए ही हम गवाँर और राड शब्द का प्रयोग करते हैं । उसमें अहीर शब्द का प्रयोग सहचर के तरह हो गया । यह किसी समुदाय पूरे के लिए नहीं था बल्कि उन जैसे गालीबाज़ों के लिए था । कुछ लोगों की भावना आहत हो सकती है इस लिए मैं माफ़ी माँगता हूँ , मेरा ऐसा उद्देश्य नहीं था ।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रचार प्रसार में अपना सबकुछ न्योछावर करते हुए संघ के महान विचारक रागी संगीत जी……!!
#मोदी_मीडिया #GodiMedia
घुसपैठियों को भगायेंगे
मगर नाम नहीं बताएँगे…..!!
#वोट_चोरी #VoteChori
मोदी जी को आजीवन प्रधानमंत्री घोषित कर दें तो सारी समस्या ही हल हो जाएगी….!!
#लोकतंत्र_बचाओ_अराजकता_हटाओ #मोदी #Modi #VoteChori #वोट_चोरी
टाइम्स नाउ नवभारत ने
#OperationRegimeChange के माध्यम से दिमागी नक्सलियों की साजिश को बेनकाब किया है।
राहुल गांधी के साथ नजर आने वाली KYS की मुदिता की भारत में बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाने की योजना स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई है।
यह कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम की देश में अशांति फैलाने की एक गहरी साजिश को उजागर करता है।
लोकतंत्र बचाने की चिंता में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी ने क्या हालत बना रखी है…..!!
#लोकतंत्र_बचाओ_अराजकता_हटाओ
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कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका बखूबी निभाना सीख लिया है, लेकिन विडंबना है कि भाजपा सत्ता में रहते हुए भी सरकार चलाना वही सीख पाई……!!
संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था।
तब से आज तक 81 दिन हो गए हैं, सत्रावसान नहीं किया गया।
सरल शब्दों में कहें तो संसद का सत्र अब भी चल रहा है।
इसका एक परिणाम यह है कि सरकार कोई अध्यादेश जारी नहीं कर सकती।
संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अगर संसद के दोनों सदनों का सत्र चल रहा हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी नहीं कर सकती।
अध्यादेश संसद द्वारा बनाए गए कानून की तरह ही होता है।
कार्यपालिका के लिए अध्यादेश का रास्ता लेना अच्छा नहीं माना जाता है।
वैसे भी दो सत्रों के बीच जारी अध्यादेश को अगले सत्र में संसद की मंजूरी लेनी होती है अन्यथा वह समाप्त हो जाता है।
यूपीए सरकार के दो कार्यकालों में 61 अध्यादेश जारी किए गए थे।
वहीं पिछले बारह साल में एनडीए सरकार ने लगभग 85 अध्यादेश जारी किए।
यानी जहां यूपीए ने हर साल करीब छह अध्यादेश जारी किए वहीं एनडीए सरकार ने सात से आठ अध्यादेश हर साल जारी किए।
यानी अब जब तक सत्रावसान नहीं होता तब तक अध्यादेश के माध्यम से कोई कानून नहीं बन सकता।














