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सदगुरु कृपा ही केवलम् ! राष्ट्र प्रथम l किसी भी प्रकार के भेदभाव से सख्त एतराज l योग प्रचारक l शिक्षक l ब्लॉगर l मोटीवेटर l हिन्दू राष्ट्र का प्रबल समर्थक ।

भारत
Joined March 2018
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बिना माँ के संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती..... श्रीमदभागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है। यही माँ शब्द की महिमा है। असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है, एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ में ही दे देती है, यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है जो पीड़ा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है और जन्म देने के बाद भी माँ के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है, इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है। ‘माँ’ शब्द एक ऐसा शब्द है जिसमे समस्त संसार का बोध होता है। जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है, क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है, वह घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम माँ शब्द को स्वर्ग से बढ़कर मानते थे, क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बड़ी रक्षक है। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है, तो वो माँ के चरणों में मिलता है। जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। एक माँ ही होती है, जो बच्चे की हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है। यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुई। बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है। दुनिया की हर नारी में मातृत्व वास करता है। बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो। नारी इस संसार और प्रकृति की ‘जननी’ है। नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है। अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ़ पाएगी। माँ एकदम से सहज रूप में होती हैं। वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। वह अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती। एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है। एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है। लेकिन आज के समय में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं और उन्हें वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप कर अपने माता-पिताओं को जो वृद्ध आश्रम में रह रहे हैं, उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढ़ाना चाहिए। क्योंकि माता-पिता से बढ़कर दुनिया में कोई नहीं होता है। माता के बारे में कहा जाए तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता। हम नदियों और अपनी भाषा को माता का दर्जा दे सकते हैं, तो अपनी माँ से वह हक क्यों छीन रहे हैं और उन्हें वृद्धा आश्रम भेजने को मजबूर कर रहे हैं। यह सोचने वाली बात है। माता के सम्मान का एक दिन नहीं होता। माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहिए। लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें। और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर होई माता अष्टमी पर्व को सार्थक बनाएं। साभार ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु शुक्ला इस धरती की समस्त माताओं को चरण वंदन!
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"पचपन" के दिन भी क्या दिन हैं!!! आपको "बचपन" में घर-घर खेलना या नकली चोर-पुलिस खेलना तो याद ही होगा??? देश ने अन्ततः प्रगति कर ली... अब हमें असली संसद की आवश्यकता ही नहीं... लॉन वाली संसद मिल गई है... दस बटा दस के लॉन में चार प्लास्टिक की कुर्सी, पीछे फ्लेक्स पर पुरानी संसद का फोटो, एक मेज, एक नकली हथौड़ा और हो गया महाभियोग... बाहर से देखो तो लगे कि मोहल्ले के बच्चे घर-घर खेल रहे हैं... तू पापा बन जा, तू मम्मी बन जा, तू जज बन जा... आज मीरा कुमार जी को बोला गया आप स्पीकर बन जाओ, वो बन गईं... खड़गे जी को बोला गया आप वकील बन जाओ, वो बन गए... बाकी सबको बोला गया आप ताली बजाओ, वो बजाने लगे!!! असली वाला महाभियोग तो सात महीने पहले ही खारिज हो गया था, 193 सांसदों ने चिट्ठी दी थी, कूड़ेदान में चली गई... किसी समझदार व्यक्ति ने वहीं समझ लिया होता कि गेम ओवर, लेकिन पप्पू तो पप्पू हैं... जब तक खिलौना नहीं मिलेगा, रोना बन्द नहीं होगा... तो मम्मी ने कहा बेटा रो मत, घर में ही नकली वाला बना देते हैं... बस फिर क्या था, नकली अदालत, नकली गुस्सा, नकली निर्णय... आप ही आरोप लगाया, आप ही बहस की, आप ही हथौड़ा मार दिया और आप ही प्रसन्न कि देखो हमने CEC को हटा दिया!!! और इस जिद में पूरी खानरेस और पूरा गठबन्धन जोकर बन गया है... बड़े-बड़े मुख्यमन्त्री, जो अपने राज्यों में सरकार चलाते हैं, आज लॉन में बैठकर एक बच्चे के खिलौने वाले नाटक में एक्स्ट्रा का रोल कर रहे थे... किसी का साहस नहीं कि बोले कि राजा जी, आपके कपड़े तो हैं ही नहीं!!! सबको डर है कि यदि सच बोला तो अगली रील में रोल नहीं मिलेगा!!! पार्टी की दशा उस खिलौना दुकान जैसी हो गई है जहाँ मालिक हर सुबह आता है, एक नया खिलौना तोड़ता है और फिर पूरे स्टाफ से कहता है इस पर ताली बजाओ!!! कल वोट चोरी वाला खिलौना तोड़ा, आज CEC वाला तोड़ा, कल को प्रधानमन्त्री वाला खिलौना भी तोड़ देंगे... स्टाफ बेचारा क्या करे, नौकरी बचानी है तो हँसना पड़ेगा!!! बाहर जनता देख रही है और सोच रही है कि यह विपक्ष है या बर्थडे पार्टी में आया हुआ जादूगर, जो हर पाँच मिनट में टोपी से नया कबूतर निकाल रहा है और स्वयं ही वाह-वाह कर रहा है... संवैधानिक समझ जीरो, पर ड्रामेबाजी फुल!!! और इसी ड्रामे में गठबन्धन की पूरी साख उसी खिलौने की तरह टूट कर बिखर गई है जिसे पाने के लिए जिद की गई थी!!! 😜😜🤣🤣 जय श्री कृष्ण! (साभार।)
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बहुत अच्छा
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अभी मोदी जी न केवल भारत, वरन पूरे विश्व की जरूरत है । मोदी जी की अहमियत आज विश्व मान रहा है, भारत के ही कतिपय लोग, विपक्षियों के बहकावे में आ जाते हैं । चलिए यदि मोदी जी अपना पद त्याग दें, तो किसको आप इस पद योग्य समझते हैं ? यह भी बतला दीजिए, मित्र!
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इससे कोई फर्क नहीं पड़ता! मोदी जी को अब रिटायर हो जाना चाहिए!
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जय श्रीराम!
प्रार्थना वह अमृतमयी सेतु है, जो भटकते हुए मन को परमात्मा की शांति से जोड़ देता है!! जय श्री राम 🙏🚩
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ऐसा शरारतन भ्रम फैलाया जा रहा है । किसने बेचा किसने खरीदा यह तो अन्वेषण का विषय है ? सच्चाई जानकर आप चौंक जाएंगे । कोई कुछ भी कहे, मोदी जी जैसा नेता आज पूरे विश्व में नहीं है, यह 100% सत्य है, इसे कोई स्वीकार करे न करे । इसको पढ़ लीजिए, फिर चर्चा करेंगे - देहरादून के दून स्कूल में राजीव गांधी के साथ एक ललित सूरी पढ़ते थे दोनों में गहरी दोस्ती हो गई ललित सूरी पढ़ाई करके निकले और राजीव गांधी भी बाद में भारत के प्रधानमंत्री बन गए लेकिन दोनों की दोस्ती बनी रही बाद में ललित सूरी चावड़ी बाजार में मेवे का होलसेल दुकान चलाने लगे फिर जब भारत में मारुति कार आई तो ललित सूरी ने अपने दोस्त राजीव गांधी से बोला यार मेरा भी कुछ सेटिंग करवा दो फिर आधे भारत की मारुति की डीलरशिप ललित सूरी को मिली और उन्होंने एक कंपनी बनाई दिल्ली ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड और ललित सूरी को बिना किसी अनुभव के बिना किसी सिक्योरिटी डिपॉजिट के आधे भारत में मारुति की डीलरशिप मिल गई और कई दशक तक भारत में मारुति के सिर्फ दो ही अधिकृत डीलर थे जिसमें से आधे भारत के डीलर ललित सूरी थे इतना ही नहीं जब मारुति की गाड़ियों में AC लगने लगा तब सुब्रोस कंपनी ललित सूरी ने बनाई और ललित सूरी की सुब्रोस कंपनी को मारुति में एक सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला फिर लोग बताते हैं कि जब ललित सूरी दिल्ली से अपनी सुब्रोस की फैक्ट्री में जाते थे तब एयरपोर्ट और आसपास के सरकारी होटल देखते थे तब उन्होंने राजीव गांधी से कहा यार यह सारे होटल हमको दिलवा दो उसके बाद राजीव गांधी ने सरकार के सारे होटल मुफ्त में ललित सूरी को दे दिया उसके बाद आईटीडीसी यानी भारतीय पर्यटन निगम के सभी होटल को भी बिल्कुल मुफ्त में ललित सूरी को दे दिया गया जिसमें उदयपुर का लक्ष्मी विलास पैलेस बेंगलुरु का द अशोक खजुराहो का अशोक होटल सहित 12 होटल थे फिर बंगाल में उसे वक्त कांग्रेस सत्ता में थी तो बंगाल सरकार का होटल द ग्रेट ईस्टर्न भी ललित सूरी को मुफ्त में दे दिया गया और देखते ही देखते ललित सूरी दुनिया के दूसरे सबसे बड़े होटल कारोबारी बन गए और जिस व्यक्ति के पिताजी का मेवे का एक्सपोर्ट इंपोर्ट करने का एक छोटा सा धंधा था वह भारत का एक समय में सबसे अमीर आदमी बन चुका था खैर वक्त है वक्त का पहिया घूमता है ललित सूरी का एक ही बेटा है केशव सूरी और वह गे यानी समलैंगिक निकल गया उसके पिछवाड़े बहुत खुजली होती थी और अंत में उसने अपने बॉयफ्रेंड से शादी कर लिया ललित सूरी की पत्नी बुढ़ापे में कंपनी संभालती हैं वह भी मजबूरी में अपने बेटे की शादी में गई थी ऐसी शादी जिसमें बहू भी लड़का था अब आप समझ गए होंगे कि राहुल गांधी क्यों कहता है कि मोदी अपने दोस्त को फायदा पहुंचाते हैं क्योंकि उसने बचपन में यही सब चीज देखा है
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कांग्रेस ने संस्थान बनाए थे, बीजेपी बेचने में लगी पड़ी है!
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सभी को नमस्कार, कृपया इसे तब पढ़ें जब आपके पास 5 मिनट का समय हो। यह काफी हद तक सच हो सकता है! 🥁🥁🥁🥁🥁🥁🥁 "मोदी" और "मोहम्मद मोसादेघ" ईरान 1951 और भारत 2026 - क्या कोई समानता है? क्या आपने कभी सोचा है कि ईरानी लोग अमेरिका को "शैतानों की धरती" क्यों कहते हैं? एक समय ईरान के तेल पर ब्रिटेन का पूरा कब्ज़ा था, जिसमें मुनाफे का 84% हिस्सा इंग्लैंड को जाता था और ईरान को केवल 16% मिलता था। 1951 में, एक सच्चे देशभक्त, मोहम्मद मोसादेघ ईरान के प्रधानमंत्री बने। वह नहीं चाहते थे कि विदेशी कंपनियों का ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण रहे। 15 मार्च 1951 को, मोसादेघ ने तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के लिए एक बिल पेश किया, जिसे भारी बहुमत से पारित कर दिया गया। 'टाइम' मैगज़ीन ने 1951 में उन्हें "मैन ऑफ़ द ईयर" चुना! लेकिन इस फैसले से ब्रिटेन के हितों को नुकसान पहुँचा। उन्होंने रिश्वत, हत्या की कोशिशों और सैन्य तख्तापलट के ज़रिए मोसादेघ को हटाने की कोशिश की, लेकिन उनकी दूरदर्शिता और लोकप्रियता ने इन साजिशों को नाकाम कर दिया। जब ब्रिटेन नाकाम रहा, तो उसने मदद के लिए अमेरिका का रुख किया। CIA ने मोसादेघ को सत्ता से हटाने के लिए 1 मिलियन डॉलर मंज़ूर किए। इस योजना में जनता के बीच असंतोष पैदा करना, मीडिया और धार्मिक नेताओं को खरीदना, और अंततः भ्रष्ट सांसदों के ज़रिए सरकार को गिराना शामिल था। मोसादेघ के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पत्रकारों, संपादकों और धर्मगुरुओं को 631 मिलियन डॉलर दिए गए। झूठे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए हज़ारों लोगों को पैसे दिए गए। वैश्विक मीडिया ने भी अमेरिका का समर्थन करना शुरू कर दिया। मोसादेघ पर हमला करने के लिए उनके निजी जीवन से जुड़े कार्टूनों का इस्तेमाल किया गया—ठीक वैसे ही, जैसे आज मोदी के निजी जीवन पर हमले किए जाते हैं। मोसादेघ को तानाशाह कहा गया। जब उन्हें एहसास हुआ कि संसद के ज़रिए उनकी सरकार गिरा दी जाएगी, तो उन्होंने संसद को ही भंग कर दिया। अमेरिका ने शाह पर मोसादेघ को हटाने का दबाव डाला, और झूठे विरोध प्रदर्शनों के बाद, मोसादेघ ने हार मान ली। उन्हें जेल में डाल दिया गया और बाद में नज़रबंद (house arrest) कर दिया गया। इसके बाद, ईरान के तेल को अमेरिका (40%), इंग्लैंड (40%) और अन्य यूरोपीय देशों (20%) के बीच बांट दिया गया। कट्टरपंथी खुमैनी सत्ता में आए, और आम ईरानियों की हालत और खराब हो गई। मोसादेघ का 'गुनाह' बस इतना था कि वे चाहते थे कि ईरान के संसाधनों पर विदेशियों का नहीं, बल्कि ईरान की अपनी कंपनियों का नियंत्रण हो। अगर मोसादेघ का साथ दिया गया होता, तो 1955 तक ईरान एक पूरी तरह से लोकतांत्रिक देश बन सकता था। लेकिन पत्रकारों, संपादकों, सांसदों और प्रदर्शनकारियों ने पैसों के लिए अपने देश का भविष्य बेच दिया। इसीलिए अमेरिका को 'शैतानों की धरती' कहा जाता है। आज, भारत भी कुछ ऐसे ही दोराहे पर खड़ा है। फर्जी मुद्दे, झूठे आंदोलन, गलत आंकड़े और लोगों को जाति व धर्म के आधार पर बांटना—ये सब भारत को फिर से विदेशी नियंत्रण में लाने की एक गहरी साजिश का हिस्सा हैं। अब समय आ गया है कि हम सतर्क रहें और भ्रष्ट मीडिया के दुष्प्रचार (प्रोपगैंडा) का शिकार न बनें। हर देशभक्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। वरना, भारत का हाल भी ईरान जैसा हो सकता है। आज, दुनिया भर की कई खुफिया एजेंसियां ​​भारतीय राजनेताओं को अपना एजेंट बनाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि मोदी सरकार को गिराया जा सके। हमारा भविष्य हमारे ही हाथों में है। बस हमें समय रहते इसे समझने की जरूरत है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने मोसादेघ को तानाशाह कहा था। आज, 'टाइम मैगजीन' मोदी को 'डिवाइडर-इन-चीफ' (बांटने वाला मुख्य व्यक्ति) कहती है। क्या यह महज एक संयोग है? नहीं, यह एक सोची-समझी रणनीति है। सोचें, समझें और जागरूक रहें। जय हिंद। कृपया इस संदेश को हर भारतीय तक पहुंचाएं। चाहे आप हिंदू हों, मुसलमान हों या किसी भी धर्म/जाति के हों—अगर देश तरक्की करेगा, तो सभी को फायदा होगा। और अगर हमारा देश डूबा, तो हम सब एक साथ डूबेंगे। 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻. Message from ...... Maj Gen BS Dhillon VSM (Retd) Bhashantar by.... Hony Sub Maj Tukaram Sonawane (Retd)
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🤔 पिछले कई महीनों से दिल्ली और जन्तर मन्तर पर कुछ ऐसे ही हालत पैदा करने की कोशिश, गाजी खान की औलादें और ग़द्दार, जय चंद, देश द्रोही सेकुलर हिन्दू कर रहे हैं और आज भी यह दिल्ली में नंगई दिल्ली में कर रहे हैं। हिंदुओं विडिओ को देखने के बाद कुछ समझ रहे हैं। अगर अब भी ना समझे हैं, तो यह जरूर समझ लें, जंग है, यह जंग देशभक्तों और देश के गद्दारोंं के बीच शुरू हो चुकी है। अब तुम्हें क्या करना है, तुम्हें ऐसे देश द्रोही ग़द्दार नमक -हराम जयचंदों को सबक सिखाना है।
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🥺😄😃😆😀😁😅
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राज्य में जहां कांग्रेस का शासन है, उसको तो चला नहीं पा रहे हैं, और इन्हें चाहिए केंद्र पर शासन करने का मौका.......
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गीता में कहा गया है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है, क्योंकि 🤱माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में 🤱माँ का सम्मान नहीं किया जाता है, वह घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम 🤱माँ शब्द को स्वर्ग से बढ़कर मानते थे, क्योंकि संसार में 🤱माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। संसार में 🤱माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में 🤱माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में 🤱माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और 🤱माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक 🤱माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। 🤱माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक 🤱माँ ही अपनी संतान की सबसे बड़ी रक्षक है।
हमारे गांव में एक बूढ़ी मां रहती थी। उसके तीन बेटे शहर में नौकरी करते थे। तीनों की शादी हो चुकी थी और अपने-अपने परिवार में व्यस्त थे। मां हर रविवार दरवाजे पर बैठकर रास्ता देखती थी। कभी कोई बेटा फोन कर लेता, कभी कोई त्योहार पर आने का वादा कर देता। एक दिन मां की तबीयत खराब हो गई। पड़ोस की लड़की उसे अस्पताल ले गई। घर की सफाई करते समय उसे मां के पुराने बक्से में एक लिफाफा मिला। उसमें तीनों बेटों के नाम से लिखे तीन खत थे। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह थी कि तीनों खत कभी भेजे ही नहीं गए थे। आखिर मां ने ऐसा क्या लिखा था? 2/2 में जानिए।
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M.V.S.Rao(Dinesh) retweeted
हमारे गांव में एक बूढ़ी मां रहती थी। उसके तीन बेटे शहर में नौकरी करते थे। तीनों की शादी हो चुकी थी और अपने-अपने परिवार में व्यस्त थे। मां हर रविवार दरवाजे पर बैठकर रास्ता देखती थी। कभी कोई बेटा फोन कर लेता, कभी कोई त्योहार पर आने का वादा कर देता। एक दिन मां की तबीयत खराब हो गई। पड़ोस की लड़की उसे अस्पताल ले गई। घर की सफाई करते समय उसे मां के पुराने बक्से में एक लिफाफा मिला। उसमें तीनों बेटों के नाम से लिखे तीन खत थे। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह थी कि तीनों खत कभी भेजे ही नहीं गए थे। आखिर मां ने ऐसा क्या लिखा था? 2/2 में जानिए।
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🤔 कुछ यही हाल, बीजेपी वालों ने....... वर्तमान विपक्ष का, कर रखा है। 😂
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🚫 गुटका छोड़ो, ज़िंदगी से नाता जोड़ो! गुटका धीरे-धीरे मुँह को बर्बाद करता है और मुँह के कैंसर का कारण बन सकता है। ⚠️ शौक के लिए ज़िंदगी दाँव पर मत लगाओ। आज ही गुटका छोड़ो! 💪 फिट है तो हिट है स्वस्थ रहो, सुरक्षित रहो!
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🚫 गुटका छोड़ो, ज़िंदगी से नाता जोड़ो! गुटका धीरे-धीरे मुँह को बर्बाद करता है और मुँह के कैंसर का कारण बन सकता है। ⚠️ शौक के लिए ज़िंदगी दाँव पर मत लगाओ। आज ही गुटका छोड़ो! 💪 फिट है तो हिट है स्वस्थ रहो, सुरक्षित रहो!
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अखण्ड भारत में ऐसे कितने ही स्थल हैं, जहां हिंदुओं का नरसंहार हुआ, आज वे मजार के रूप में प्रचलित हैं, कोई भी सत्य उजागर करना नहीं चाहता है......
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छत्तीसगढ़ , मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरलम , तमिलनाडु , कर्नाटक, पंजाब , हरियाणा , दिल्ली , चंडीगढ़ , पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान निकोबार के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं!
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आखिर जान बचाने लिए, सानिया मिर्जा को भारत आना पड़ा, परन्तु भारत में अब भी ऐसे लोग हैं, जिन्हें भारत ने उच्च पद दिया, सम्मान दिया, प्यार दिया, धन अर्जित करने का मौका दिया......फिर भी आज वे कहते हैं, भारत उनके लिए सुरक्षित नहीं है, उन्हें भारत में डर लगता है । ऐसे लोगों को यह सलाह दी जाती है कि कुछ दिन पाकिस्तान में रह कर, घूम फिरकर.....आ जाइए ।
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बॉलीवुड देश विरोधी और सनातन धर्म विरोधी रहा है, यह उस वक्त के फिल्मों से स्पष्ट रूप से सिद्ध होता है......
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