पिंकू शुक्ला retweeted
झाड़ू और मिट्टी के दीपक से लेकर सोना, चांदी तक
साइकिल से लेकर BMW तक
गुड़ से लेकर काजू कतली तक
सब कुछ बिक रहा है किसी बेजुबान की हत्या किए बिना
यही सनातन की सुंदरता है🙏🚩
झाड़ू और मिट्टी के दीपक से लेकर सोना, चांदी तक
साइकिल से लेकर BMW तक
गुड़ से लेकर काजू कतली तक
सब कुछ बिक रहा है किसी बेजुबान की हत्या किए बिना
यही सनातन की सुंदरता है🙏🚩
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सोच रहा हूँ…
धीरेंद्र शास्त्री अगर बोल देते मेरे वाले का जन्मस्थान कब्जा मुक्त हो गया
तुम्हारे वाले का जन्मस्थान कब्जा मुक्त कब करवाओगे?
तब भी ये ऐसे ही विरोध करते क्या?🤔
सोच रहा हूँ…
धीरेंद्र शास्त्री अगर बोल देते मेरे वाले का जन्मस्थान कब्जा मुक्त हो गया
तुम्हारे वाले का जन्मस्थान कब्जा मुक्त कब करवाओगे?
तब भी ये ऐसे ही विरोध करते क्या?🤔
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सुबह रामायण मूवी का एक वीडियो शेयर किए थे जिसमें परसुराम और राम संवाद का दृश्य था , उसमें लक्ष्मण ऐसे बोल रहे थे जैसे कोई चौराहे का लफ़ंगा ।
उस वीडियो पर काफी लोगों ने मुझे ज्ञान दिया कि मुझे क्या दिक्कत है।
मुझे लगता है, सच में मुझे दिक्कत नहीं होनी चाहिए ।
अब तो केवल इतना ही संवाद में बचता है , जब लक्ष्मण परसुराम से बोले कि ," अबे निकल बुड्ढे, आकर यहां बक बक न कर "।
यदि इसे भी कुछ दिन बाद कोई डायरेक्टर जोड़ देगा, तो भी इस सरकार में इसके अंधभक्त इस संवाद को सामान्य बताएंगे । बस डायरेक्टर इनके अब्बाजान से जुड़ा होना चाहिए ।
पिंकू शुक्ला retweeted
मायलॉर्ड हम तो बिना प्रदूषण वाले पटाखे जलाकर दिवाली मना लेंगे...
थोड़ा उनको भी बोलो कि बिना खून वाला बकरा काटे और अपना त्यौहार मना लें..!
पिंकू शुक्ला retweeted
।
= धन तेरस =
--------
मिट्टी के खिलौनों की वो दुकानें कहाँ,
चवन्नी में मिलती थीं जो
खुशियाँ वहाँ।
माँ के हाथों से सजी वो मिठाई
की थाली,
पिता के संग बाज़ार जाने की
दिवाली।
नए कपड़ों की ख़ुशबू, वो
बचपन की चाह,
पटाखों की आवाज़ों में गूँजती
थी राह।
न लक्ष्मी की चिंता, न धन का
था मोह,
छोटी-छोटी ख़ुशियों में मिलता
था सुकून।
अब सोने-चाँदी की चमक तो
बहुत आएगी,
पर रिश्तों में वो पहले सी दमक न आएगी।
धनतेरस पर धन तो हर घर में
आएगा,
पर बचपन का वो ख़ज़ाना कहाँ से आएगा?
शुभ धन तेरस
।
#औ_का
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जिनके विचारों का लेवल आपके घुटनों से भी नीचा हो उनसे बहस नही नजरअंदाज करना चाहिए ।
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वो अदा फरेब ए महफ़िल, वो नज़र बला ए जाँ है
मुझे क्या यक़ीन आए, के वो मुझ पे मेहरबाँ है
कोई बज़्म यह ना पूछे, यह मामला है दिल का
के जहाँ क़दम वो रख दे, वो ज़मीं भी आसमाँ है..!!
♥️♥️
पिंकू शुक्ला retweeted
मजे की बात है कि राहुल गांधी और तिलचट्टा गिरोह तो लोकतन्त्र बचा ही रहे थे।
अब भाजपा भी लोकतंत्र बचाने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
अब लोकतंत्र ससुर भाग के कहां जाएगा।
इसको बचने से कोई रोक नहीं सकता।
मजे की बात है कि राहुल गांधी और तिलचट्टा गिरोह तो लोकतन्त्र बचा ही रहे थे।
अब भाजपा भी लोकतंत्र बचाने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
अब लोकतंत्र ससुर भाग के कहां जाएगा।
इसको बचने से कोई रोक नहीं सकता।
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यही सुंदरता है हमारे त्योहारों की। आज ट्रांसगोमती के एक बाजार में पहुंचा तो 80 फीसदी भीड़ फुटपाथ और ठेलों पर उमड़ी थी। कंधे से कंधे टकरा रहे थे। तभी तो ‘धन-तेरस’ कहा गया है। मां लक्ष्मी की कृपा छोटे बड़े सभी उन व्यापारियों पर बरसेगी जो इस परम्परा से जुड़े हैं लेकिन पश्चिमी शैली से जुड़े इसमें शामिल नहीं।
नहीं तो पूरे साल कौन अलग से खील बताशे खिलौने खरीदने जाता है। कौन मिट्टी से बनी वस्तुएं खरीदने को बाध्य होता है।
#Dhanteras2026 #धनतेरस #धनतेरस_की_हार्दिक_शुभकामनाएं
पिंकू शुक्ला retweeted
।
धनतेरस के मौके पर
आपने नहीं दिया तो एआई से लिया
।
#औ_का
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तुमने कहा था
हाथ पकड़ लो मेरा
इसमे क्यों झिझकते हो
तुम्हारे कोमल हाथों ने
केवल मेरी हथेली
ही नही पकड़ी थी
पकड़ लिया था
मेरा संसार
मेरी खुशियां
मेरी जिंदगी ;
तुम्हारे जाने के बाद
रुका हुआ है मेरा संसार
समंदर किनारे
चाय पीते हुए
एक दूसरे का हाथ
पकड़े हुए ...
#मेरी_अनकही
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रावण की मृत्यु के बाद सूर्पनखा का क्या हुआ? किसी के पास उसका अड्रेस या फोन नंबर है क्या?
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Sardar Patel united India. Our security forces have paid in blood to keep it united.
This October 31, India marks a historic milestone in its fight against armed Naxalism. But behind this victory lie decades of sacrifice, courage and countless lives lost.
A tribute to the men and women who defended Patel’s vision of a united India.
My latest article:
english.swadeshnews.in/story…
पिंकू शुक्ला retweeted
मैं जो हूं
वो फ़कत मेरे लिये हूं मैं, जनाब
जब कि
मै जो नहीं हूं
ये सारी दुनिया वही मानती है मुझे......!!
पिंकू शुक्ला retweeted
पूरे साढ़े 9.5 साल तक सिर्फ जाति की बात करने के बाद, भगवान को भी जाति से जोड़ने के बाद, कुछ विश्वविद्यालयों में 91% आरक्षण और SC/ST/OBC के लिए फ्री कोचिंग जैसी जातिवादी योजनाएँ चलाने के बाद…
अब चुनाव आते ही ये ब्रह्मज्ञान याद आ गया?
क्या हार का डर सता रहा है?
















