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नज़रें जिधर जायेंगी, सब अधिकारी ही दिखाई देंगे।
समीक्षा अधिकारी में दोस्तों के चयन होने पर आधी रात को बधाई देने पहुंचा 😅😍
बचपन से अभी तक साथ पढ़ने वाले शैलेन्द्र भाई की रैंक 124 और जुगल भैय्या की रैंक 13... ❤
आजमगढ़ में पूजा कराने गये 2 पंडितों की गोली मारकर हत्या। @yadavakhilesh @masijeevi इस पर आप लोगों का ट्विट कब आयेगा ? 😇
@RahulGandhi
कुछ लोगों का कहना है कि कानून के दुर्पयोग के डर से क्या कानून ही खत्म कर दिया जाये? ऐसा कहने वाले के पास इस बात का कोई जवाब है कि यदि एक निर्दोष व्यक्ति का मानिसक, शारीरिक, आर्थिक शोषण कानून के दुर्पयोग से हुआ तो उसकी भरपाई कैसे होगीं? हराम की खाने वालों को ये समझ नहीं आयेगा। 😊
असली जातिवादी, इन जहरीले नागों के लिये सवर्ण एक्ट जरूरी है।
जमुई कांड के वक्त जातीय सम्मेलन कर रहे सम्राट चौधरी ने रात में पुलिस अधिकारी को फ़ोन घुमाकर पूछा
CM: लड़की छेड़ने वाले ने किस रंग का गमछा लपेटा हुआ था?
पुलिस- सर…..भगवा! एकदम आप जैसा
CM:- फिर तो वह भगवा बलात्कारी ना हुआ। मतलब विचार से तो सात्विक और मोदी समर्थक ही होगा ना जी?? अच्छा…ध्यान से देखिए उस भगवा गमछे में कहीं राई भर भी हरा रंग है?
पुलिस:- नहीं हुज़ूर, हमारे IO ने तो आपकी फर्जी AI को दर्जी बनाकर पूछ लिया, कहीं हरा नहीं है। AI कह रहा है कि इन आरोपियों की उम्र में बोरिंग रोड पर आपका CM भी यही काम करता था।
CM:- बकवास बंद करो, जल्दी से आरोपियीं की जाति बताओ?
पुलिस:- सर, ये सब इधर के ही समर्थक है।
CM:- कुछ करो, मुस्लिम और यादव एंगल ढूंढो, कैसे भी।
पुलिस:- सर मुश्किल है
CM:- सस्पेंड कर देंगे तुमको, जो बोला वो करो! किसी दारू और मर्डर केस के आरोपी को इस केस में फँसा दो लेकिन कछु करो यार….
पुलिस:- सर, हम तो आपसे ज्यादे ही व्याकुल है।
CM:- ज़्यादा होशियार बनते है, जल्दी करो!
दाँत पीसते हुए, मोदी जी अब चुनाव में कहाँ से ,“मारब सिक्सर की छहो गोली छाती में रे, पॉवर होला ई ख़ाली…जाति में रे”” गाना टेलीप्रॉम्प्टर पर गायेंगे?
बुदबुदाते हुए, ये हरा गमछा और AI वाला डायलॉग हमको कौन अधिकारी रटवाया था रे….दीपक? जरा पता करो…
मेरा मानना था कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती है लेकिन कुछ जातिवालों ने इतना जाति का आरोप लगा दिया कि सबकी जाति बाहर आने लगी। अपराधियों की भी जाति होती है। लेकिन सवा दो कौड़ी के नंगा नाच करने वाले लोंगों को सिर्फ जाति तब दिखती है जब अपराधी सवर्ण होता है। 😇
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The IIT Bombay student suicide is claimed as "caste-discrimination".
Now let's see the suicide data from central institutions (2014-21)👇
Total suicides=122
SC/ST/OBC=68
GC=54
Question is-
If caste-discrimination is killing SC/ST/OBC students,
what is killing GC students????
X पर आज 12 साल पूरे हो गए! ⏳
यादों, बहसों, और अनगिनत सीख के साथ यह सफर बेहद खूबसूरत रहा है। साथ निभाने वाले सभी दोस्तों का दिल से शुक्रिया! 🚀✨
Do you remember when you joined X? I do! #MyXAnniversary
Rahul Trivedi retweeted
साहिल वकोड़े IIT बॉम्बे के छात्र थे। परीक्षा चल रही थी। पूरा प्रश्नपत्र AI एप्प को अपलोड कर के उत्तर कॉपी में लिख रहे थे। प्रोफेसर ने पकड़ लिया। बाहर ले गए, डाँटा और कहा कि संस्थान के नियम स्पष्ट हैं आप चोरी करते पकड़े गए तो सस्पेंड किए जा सकते हो।
साहिल ने बाद में आत्महत्या कर ली। माँ-बाप ने पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया क्योंकि उन्हें न्याय चाहिए। न्याय पाने के लिए उन्होंने मोदी एक्ट की धाराएँ लगवा दीं प्रोफेसर पर।
एक लड़का आरक्षण से IIT पहुँचा। कम नंबर न आए, इसलिए चोरी कर रहा था। वह टॉपर बनना चाह रहा था। पर एक मनुवादी शिक्षक ने उसे कॉलेज के कानून बताए, सस्पेंड किया भी नहीं। उसने आत्महत्या कर ली।
क्या एक दलित को फोन ले जाने अनुमति नहीं होनी चाहिए? क्या ऐतिहासिक प्रताड़ना के कारण उसको ओपन मोबाइल परीक्षा देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए?
आज एक ब्राइट स्टूडेंट, जो जेट इंजन बना सकता था AI से पूछ कर, हमारे बीच इसलिए नहीं रहा क्योंकि उससे पहले ही चरण में रोक लिया गया। मोदी एक्ट इसीलिए बना ही है।
प्रोफेसर को फाँसी होनी चाहिए।
और यह देखकर गिरगिट ने झटपट खुदखुशी कर ली। 😊
कांग्रेस वाला हाल होगा SP का भी!
लक्ष्मण यादव, बिहार वाली दो प्रवक्ता बहने और राजकुमार भाटी ।
ये 2027 के महान योद्धा होंगे, लेकिन इनकी महानता नकारात्मक होगी! समस्त यादव इनको मन में गालियां दे रहा होगा लेकिन बाहर से बचाव करेगा।
तो भाई विजेन्द्र साहब 🙏
फिर आरक्षण है क्या? समानता लाना है तो कितनी सामनता आयी? नहीं आयी तो क्यों नहीं आयी? यानी योजना फेल है इसे तुरंत बंद करना चाहिए।
भारत में कुछ लोग खुद से ज्यादा ज्ञानी किसी को नहीं मानते उनमें से एक विजेन्द्र सर हैं।
आरक्षण गरीबी हटाने की योजना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक भेदभाव का जवाब है जो पीढ़ियों से लोगों के अवसर छीनता रहा है।
अगर आर्थिक स्थिति सुधर जाने से जाति खत्म हो जाती, तो शायद आरक्षण की बहस भी खत्म हो जाती।
सवाल है क्या आज भी समाज किसी व्यक्ति को उसकी जाति के आधार पर देखना बंद कर चुका है?
आरक्षण पर राय देने से पहले उसके उद्देश्य को समझना जरूरी है।
#Reservation #CasteDiscrimination #SocialJustice #India
5000 साल से प्यासे लोग खुद एक गाड़ी पर वही शब्द लिखकर Flex कर रहे थे और जब अजीत भारती बोल दिया तो वह जातिसूचक गाली हो गयी और इनकी दलाली करने वाले सामान्य वर्ग के कुछ लोगों को जाति के नाम पर शोषणसंतोष वर्मा और राजकुमार भाटी जब ब्राह्मण लड़कियों पर अभद्र टिप्पणी करते थे तब न दिखा















