शब्दसार (@shabdsar) header
शब्दसार (@shabdsar) profile picture

साहित्य | संगीत | कला

India
Joined September 2019
Photo by शब्दसार (@shabdsar)Photo by शब्दसार (@shabdsar)Photo by शब्दसार (@shabdsar)Photo by शब्दसार (@shabdsar)Photo by शब्दसार (@shabdsar)Photo by शब्दसार (@shabdsar)
तुलसी साथी विपत्ति के,विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक॥ ~ तुलसीदास
9
47
3,424
आखिरी मछली को निगलकर बगुले ने तालाब से पूछा 'तुम इन दिनों इतने उदास क्यूँ रहते हो ?' ~सुधांशू फिरदौस
2
7
38
3,997
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे ~ तहज़ीब हाफ़ी
5
26
2,897
किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिए, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है। ~ रविन्द्रनाथ टैगोर
1
5
38
4,072
चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं। मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते। लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं अपने गिरने के बारे में मनुष्य कर सकते हैं। ~ नरेश सक्सेना
1
9
29
3,381
अहा ❤️
3
9
1,430
तुम मेरा प्यार चुनते हो और मैं तुम्हारा भरोसा तुम्हें फूलों से लगाव है और मैं बटोर लाती हूँ बिखरी हुई पत्तियां! एक दूसरे को चुनकर भी मैं चाहती हूँ हम स्वतंत्र हो मनचाहा चुनने के लिए! ~नरेश गुर्जर
6
20
1,633
अजीब शहर है घर भी हैं रास्तों की तरह किसे नसीब है रातों को छुप के रोना भी ~अज़ीज़ क़ैसी
2
8
1,214
जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह। धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह।। ~ रहीम
2
23
1,687
ये लड़कियाँ भी अजीब होती हैं किसी की थोड़ी सी दिल्लगी को समझ लेती हैं प्रेम और जी लेती हैं खुश होकर हँस लेती हैं गुनगुना लेती हैं कोई गीत मनचाहा.. छले जाने की पीड़ा को सह लेती हैं चुपचाप आँचल में बांध लेती हैं गांठ भर प्रेम और जी लेती हैं जीवन किसी के नाम पर.. नीलाक्षी मृणाल
10
1,283
समुद्र और रेगिस्तान में अजीब साम्य है - दोनो ही होते हैं विशाल लहरों से भरे हुए और दोनों ही भटके हुए आदमी को मारते हैं, प्यासा। ~ नरेश सक्सेना
8
28
1,917
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे ~ तहज़ीब हाफ़ी
1
8
77
2,957
उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था 'मुनीर' जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा ~मुनीर नियाज़ी
18
1,296
न द्वारका में मिलें बिराजे, बिरज की गलियों में भी नहीं हो। न योगियों के हो ध्यान में तुम, अहम जड़े ज्ञान में नहीं हो। तुम्हें ये जग ढूँढता है मोहन, मगर इसे ये खबर नहीं है। बस एक मेरा है भाग्य मोहन, अगर कहीं हो तो तुम यही हो। ~डॉ कुमार विश्वास(@DrKumarVishwas)
3
19
1,508
सुनिए ❤️
5
12
1,568
“सब कुछ खोने के बाद भी अगर आपमें कुछ करने की हिम्मत है, तो समझ लीजिए आपने कुछ नहीं खोया है” ~ अज्ञात
35
176
5,438
तन का बैरी कोई नहीं जो मन सीतल होये तु आपा को डारी दे, दया करै सब कोई। ~कबीरदास
2
41
2,481
अंत में… अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता, सुनना चाहता हूँ एक समर्थ सच्ची आवाज़ यदि कहीं हो। अन्यथा इसके पूर्व कि मेरा हर कथन हर मंथन हर अभिव्यक्ति शून्य से टकराकर फिर वापस लौट आए, उस अनंत मौन में समा जाना चाहता हूँ जो मृत्यु है। ‘वह बिना कहे मर गया’ यह अधिक गौरवशाली है यह कहे जाने से— ‘कि वह मरने के पहले कुछ कह रहा था जिसे किसी ने सुना नहीं।’ ~सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
1
22
1,438
तुमने आदमी को खाली पेट दिया ठीक किया पर एक प्रश्न है रे नियति खाली पेटवालों को तुमने घुटने क्यों दिये ? फैलानेवाला हाथ क्यों दिया ?  ~अभिमन्यु अनत
1
28
1,894
'...ये ही सब चीज़ें तो प्यार हैं— यह अकेलापन, यह अकुलाहट, यह असमंजस, अचकचाहट, आर्त अनुभव, यह खोज, यह द्वैत, यह असहाय विरह व्यथा, यह अंधकार में जागकर सहसा पहचानना कि जो मेरा है वही ममेतर है' ~ अज्ञेय
2
21
1,594