ये लड़कियाँ भी अजीब होती हैं
किसी की थोड़ी सी दिल्लगी को
समझ लेती हैं प्रेम
और जी लेती हैं खुश होकर
हँस लेती हैं
गुनगुना लेती हैं
कोई गीत मनचाहा..
छले जाने की पीड़ा को सह लेती हैं चुपचाप
आँचल में बांध लेती हैं
गांठ भर प्रेम
और जी लेती हैं जीवन
किसी के नाम पर..
नीलाक्षी मृणाल
न द्वारका में मिलें बिराजे,
बिरज की गलियों में भी नहीं हो।
न योगियों के हो ध्यान में तुम,
अहम जड़े ज्ञान में नहीं हो।
तुम्हें ये जग ढूँढता है मोहन,
मगर इसे ये खबर नहीं है।
बस एक मेरा है भाग्य मोहन,
अगर कहीं हो तो तुम यही हो।
~डॉ कुमार विश्वास(@DrKumarVishwas)
अंत में…
अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता,
सुनना चाहता हूँ
एक समर्थ सच्ची आवाज़
यदि कहीं हो।
अन्यथा
इसके पूर्व कि
मेरा हर कथन
हर मंथन
हर अभिव्यक्ति
शून्य से टकराकर फिर वापस लौट आए,
उस अनंत मौन में समा जाना चाहता हूँ
जो मृत्यु है।
‘वह बिना कहे मर गया’
यह अधिक गौरवशाली है
यह कहे जाने से—
‘कि वह मरने के पहले
कुछ कह रहा था
जिसे किसी ने सुना नहीं।’
~सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

