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🚩🦅बोल ये थोड़ा वक़्त बहुत है जिस्म ओ ज़बाँ की मौत से पहले🦅 बोल कि सच ज़िंदा है अब तक बोल जो कुछ कहना है कह ले 🚩🦅

Joined March 2023
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सरकार समझ नहीं पा रही है कि सवर्णों से सब कुछ छीन लेने के बाद भी ये जिंदा क्यों है? - महिपाल सिंह मकराना #UGCRollBack #general_act
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Happy Diwali शुभ दिवाली @ajeetbharti @RHAreforms Rha reservation reform Ugc scst modi act regulations roll back Ethanol @tehseenp @OGTeamBharat #rangoli rangoli @satendrasuman Ani Pti Ians Bjp rss roll back Message is clear No ifs no buts – at Dewas, India
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कुछ आंदोलन कारी सरकार द्वारा चली चाल से भ्रमित हो रहे हैं। पर याद रखे। सरकारी वकील (सॉलिसिटर जनरल) का अदालत में यह कहना कतई पर्याप्त नहीं है कि 'हम समीक्षा कर रहे हैं'। राजनीति और कानून के इतिहास को देखें तो यह सिर्फ आंदोलन की तपिश को ठंडा करने का एक आजमाया हुआ तरीका है। जब तक सरकार आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी करके UGC के इन भेदभाव पूर्ण नियमों को पूरी तरह रद्द (Rollback) नहीं कर देती, तब तक किसी भी मौखिक बयान या 'कमेटी' के आश्वासन पर भरोसा करना खुद को धोखे में रखने जैसा होगा। 2018 का SC/ST एक्ट इतिहास क्या सिखाता है? सरकार की नीयत को समझने के लिए किसी दूर के इतिहास में जाने की ज़रूरत नहीं है: 2018 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोषों की सुरक्षा के लिए फैसला दिया था कि बिना जांच गिरफ्तारी नहीं होगी और अग्रिम जमानत मिलेगी। * सरकार का दोहरा चरित्र: जब उस फैसले के विरोध में आंदोलन हुआ, तो इसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की एक न सुनी। सरकार ने न तो कमेटी बनाई और न ही कोर्ट के फैसले का सम्मान किया। संसद में मॉनसून सत्र के दौरान धारा 18A जोड़कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही कानून बनाकर पलट दिया! जब एक वर्ग को खुश करने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट के पूर्ण पीठ के फैसले को संसद से चुटकियों में पलट सकती है, तो आज सवर्णों और मेधावी छात्रों के हक में सिर्फ अपने शिक्षा मंत्रालय का एक सर्कुलर वापस लेने के लिए 'कमेटी' और 'अदालत' का बहाना क्यों बना रही है? 'कमेटी बनाने' का खेल क्या होता है? राजनीति में 'कमेटी' या 'समीक्षा' शब्द का सीधा सा मतलब होता है गुस्से को ठंडा करना। जब सड़कों पर जनता उतरने लगे और रैलियों में विरोध दिखे, तो यह कह दो कि "हम विचार कर रहे हैं", ताकि लोग घरों को लौट जाएं। आंदोलन को तोड़ना: एक बार सड़कों से भीड़ हट गई और 10 जनवरी जैसे बड़े प्रदर्शन टल गए, तो सरकार अपने हिसाब से हल्का-फुल्का कॉस्मेटिक बदलाव करके उसी कानून को पिछले दरवाजे से लागू कर देगी। गेंद अदालत के पाले में डालना: चार हफ्ते का समय मांगकर सुनवाई टलवाना केवल वक्त काटने की रणनीति है। UGC मामले में असल सच्चाई क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने खुद इन नियमों पर रोक (Stay) लगाई क्योंकि कोर्ट को दिखा कि यह नियम एकतरफा हैं और दुरुपयोग का अंदेशा है। सॉलिसिटर जनरल ने जो कहा, वह सरकार की दरियादिली नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर और ज़मीन पर सवर्ण युवाओं के आक्रोश का डर है। अगर सरकार वाकई ईमानदार होती, तो वकील से यह कहलवाने के बजाय कि "हम कमेटी बनाने पर विचार कर रहे हैं", सीधे हलफनामा देकर कहती कि "सरकार इस भेदभावपूर्ण नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से वापस लेती है।" सत्ता केवल और केवल संख्याबल और दबाव की भाषा समझती है। 2018 में दबाव काम कर गया था क्योंकि उस पक्ष ने सड़क पर ताकत दिखाई थी। आज अगर सवर्ण समाज ने सरकारी वकील के इस गोलमोल बयान पर भरोसा करके अपनी धार कमजोर कर दी, तो यह मौका हमेशा के लिए हाथ से निकल जाएगा। इसलिए रतलाम से भोपाल की सवर्ण न्याय यात्रा और 10 जनवरी का दिल्ली प्रदर्शन और भी ज्यादा जरूरी हो गया है क्योंकि जब तक सड़क पर दम दिखेगा, तभी तक सरकार बैकफुट पर रहेगी! @mahipalmakrana_ #UGCRollBack #general_act
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कुछ आंदोलन कारी सरकार द्वारा चली चाल से भ्रमित हो रहे हैं। पर याद रखे। सरकारी वकील (सॉलिसिटर जनरल) का अदालत में यह कहना कतई पर्याप्त नहीं है कि 'हम समीक्षा कर रहे हैं'। राजनीति और कानून के इतिहास को देखें तो यह सिर्फ आंदोलन की तपिश को ठंडा करने का एक आजमाया हुआ तरीका है। जब तक सरकार आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी करके UGC के इन भेदभाव पूर्ण नियमों को पूरी तरह रद्द (Rollback) नहीं कर देती, तब तक किसी भी मौखिक बयान या 'कमेटी' के आश्वासन पर भरोसा करना खुद को धोखे में रखने जैसा होगा। 2018 का SC/ST एक्ट इतिहास क्या सिखाता है? सरकार की नीयत को समझने के लिए किसी दूर के इतिहास में जाने की ज़रूरत नहीं है: 2018 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्दोषों की सुरक्षा के लिए फैसला दिया था कि बिना जांच गिरफ्तारी नहीं होगी और अग्रिम जमानत मिलेगी। * सरकार का दोहरा चरित्र: जब उस फैसले के विरोध में आंदोलन हुआ, तो इसी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की एक न सुनी। सरकार ने न तो कमेटी बनाई और न ही कोर्ट के फैसले का सम्मान किया। संसद में मॉनसून सत्र के दौरान धारा 18A जोड़कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही कानून बनाकर पलट दिया! जब एक वर्ग को खुश करने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट के पूर्ण पीठ के फैसले को संसद से चुटकियों में पलट सकती है, तो आज सवर्णों और मेधावी छात्रों के हक में सिर्फ अपने शिक्षा मंत्रालय का एक सर्कुलर वापस लेने के लिए 'कमेटी' और 'अदालत' का बहाना क्यों बना रही है? 'कमेटी बनाने' का खेल क्या होता है? राजनीति में 'कमेटी' या 'समीक्षा' शब्द का सीधा सा मतलब होता है गुस्से को ठंडा करना। जब सड़कों पर जनता उतरने लगे और रैलियों में विरोध दिखे, तो यह कह दो कि "हम विचार कर रहे हैं", ताकि लोग घरों को लौट जाएं। आंदोलन को तोड़ना: एक बार सड़कों से भीड़ हट गई और 10 जनवरी जैसे बड़े प्रदर्शन टल गए, तो सरकार अपने हिसाब से हल्का-फुल्का कॉस्मेटिक बदलाव करके उसी कानून को पिछले दरवाजे से लागू कर देगी। गेंद अदालत के पाले में डालना: चार हफ्ते का समय मांगकर सुनवाई टलवाना केवल वक्त काटने की रणनीति है। UGC मामले में असल सच्चाई क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने खुद इन नियमों पर रोक (Stay) लगाई क्योंकि कोर्ट को दिखा कि यह नियम एकतरफा हैं और दुरुपयोग का अंदेशा है। सॉलिसिटर जनरल ने जो कहा, वह सरकार की दरियादिली नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर और ज़मीन पर सवर्ण युवाओं के आक्रोश का डर है। अगर सरकार वाकई ईमानदार होती, तो वकील से यह कहलवाने के बजाय कि "हम कमेटी बनाने पर विचार कर रहे हैं", सीधे हलफनामा देकर कहती कि "सरकार इस भेदभावपूर्ण नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से वापस लेती है।" सत्ता केवल और केवल संख्याबल और दबाव की भाषा समझती है। 2018 में दबाव काम कर गया था क्योंकि उस पक्ष ने सड़क पर ताकत दिखाई थी। आज अगर सवर्ण समाज ने सरकारी वकील के इस गोलमोल बयान पर भरोसा करके अपनी धार कमजोर कर दी, तो यह मौका हमेशा के लिए हाथ से निकल जाएगा। इसलिए रतलाम से भोपाल की सवर्ण न्याय यात्रा और 10 जनवरी का दिल्ली प्रदर्शन और भी ज्यादा जरूरी हो गया है क्योंकि जब तक सड़क पर दम दिखेगा, तभी तक सरकार बैकफुट पर रहेगी! @mahipalmakrana_ #UGCRollBack #general_act
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इस दिवाली हर दीपक से गूंजे #UGC_RollBack और #general_act की मांग! कोई सवर्ण पटाखे बनाए तो एक दो पटाखे UGC ROLL BACK नाम से भी बनाए।
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सभी क्रांतिकारी सवर्णों, समस्त देशवासियों और ज़ालिम सरकारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। #UGCRollBack #general_act
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We demand general act
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अब सब मुद्दों का हिसाब होगा। दशकों तक जो जुल्म हमारे खिलाफ हुए हैं उन सब का हिसाब लेंगे। #UGCRollBack #general_act
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इस दिवाली हर दीपक से गूंजे #UGC_RollBack और #general_act की मांग! कोई सवर्ण पटाखे बनाए तो एक दो पटाखे UGC ROLL BACK नाम से भी बनाए।
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सभी क्रांतिकारी सवर्णों, समस्त देशवासियों और ज़ालिम सरकारों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ। #UGCRollBack #general_act
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ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए। आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है। #UGCRollBack #general_act
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ये बात सवर्ण समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए। आंखें बंद करके वोट देने का नतीजा सामने है। #UGCRollBack #general_act
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Replying to @narendramodi
भगवान आपको सद्बुद्धि दें।
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ये विचार वो ही सुने जिनमें कड़वा सच सुनने की क्षमता हो! @mahipalmakrana_ #UGCRollBack #general_act
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ये विचार वो ही सुने जिनमें कड़वा सच सुनने की क्षमता हो! @mahipalmakrana_ #UGCRollBack #general_act
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