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रावण के प्रति नख भर सम्मान वैदिक संस्कृति के प्रति द्रोह है।
रावण प्रतीक है व्यभिचार का जिसने अपनी पुत्रवधू तक पर कुदृष्टि डाली, अपनी पत्नी मंदोदरी की बहन के माया के साथ कुकर्म किया और उसके पति को मारकर उसे उठा लाया।
रावण प्रतीक है अपने सगे संबंधियों को त्रास देने का, उसने अपनी बहन सूर्पनखा के पति विद्युत जिह्वा की हत्या कर दी। उसने अपने भाई से लंका छीन ली, अपने पिता को त्रास दिया, अपने मामा को स्वार्थ में मरवा दिया। अपने कुल खानदान को अपनी महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ा दिया। अपने भाई को लात मार भगा दिया।
रावण प्रतीक है अघन्या गाय के हत्यारे का, ऋषियों ब्राह्मणों के सामूहिक नरसंहार का। वैदिक व्यवस्था का परम शत्रु था रावण। यज्ञ और धर्म के किसी भी स्वरूप को अमान्य घोषित करने वाला रावण वैदिक देवताओं के प्रति घोर असभ्य था।
रावण प्रतीक है कृतघ्नता का, उसने भगवान शिव से कृतघ्नता की, वह उतना ही शिवभक्त था जितना भस्मासुर, वस्तुतः उसने शिव के सामने दीन हीन होने का ढोंग किया। वह भगवान शिव से भी अहंकार करता था। ब्रह्मा से वर प्राप्त करने के बाद उनके प्रति भी वह कृतघ्न हो गया। अपने मित्रों से भी उसने कृतघ्नता की।
रावण प्रतीक है शक्ति और ज्ञान के दुरुपयोग का, कुसंस्कारित कुपात्र को विद्या मिलने पर वह क्या करता है इसका जीता जागता उदाहरण रावण है।
रावण प्रतीक है क्षुद्र बुद्धि और मलिन मानस का, नारी जाति के प्रति घृणा का, सुर धेनु विप्र और मनुष्य के प्रति घृणा रखने वाला रावण प्रतीक है दम्भ, असभ्यता और विध्वंस का।
कुछ घृणित लोग रावण को महान बता रहे यह ठीक वैसी ही बात है जैसे कुछ नीच लोग महिषासुर को महान बताते हैं। पहले समाज के रावणों और महिषासुरों का सजीव दहन मर्दन होता था पर बलिहारी इस लोकतंत्र की कि हर टुच्चा आदमी अपनी दो कौड़ी की जबान हिला कर कुछ भी बोल सकता है।
पहचानिए ऐसे दुष्टात्माओं को और दहन करिये उनका।
और हां ये ब्रह्महत्या वाला पाप फर्जी नरेटिव है, ब्रह्मा जिसके वध की इच्छा स्वयं रखते हों ऐसे गोघाती, सुर त्रासी ब्राह्मण द्रोही रावण के वध पर ब्रह्म हत्या लगने की बात कोई घृणित व्यक्ति ही कह सकता है।
जय जय श्रीराम
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भारत में अगर कोई शहर दीपावली के समय सबसे खूबसूरत लगता है तो वह है पिंक सिटी मतलब की जयपुर
एक बार अगर दीपावली के समय जिसने जयपुर घूम लिया,
वह हर साल जयपुर घूमने आता है दीपावली पर
इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है ऐसे ही विदेशी लोग जयपुर की तरफ नहीं भागते कुछ तो खास है
Happy Diwali to all my friends from Jaipur. Happy Diwali.🛸🎆🎇🪔🪅🎋🪔🧨
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दुनिया की सबसे सजावट वाली कोई दीवाली है तो वो पिंक सिटी जयपुर की है क्योंकि इसमें इतनी रोशनी के अलवा साथ साथ मे यहां के लोगो....Read More
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दीपावली के आगमन पर…
जोधपुर…
राजस्थान के शहर दीपावली पर हमेशा से सजते आए हैं
जयपुर सबसे ज़्यादा ख़ूबसूरती से सजता है…
फिर जोधपुर, बीकानेर, कोटा…
और किसी राज्य में इस तरह शायद ही सजाते हो शहरों को,..
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This 6kka generation does not burst firecrackers. Gen Z and Gen Alpha. A lot of my favourite childhood memories as a little boy was walking around like a commando with a bag full of explosives especially blowing up that green bomb. Diwali should sound like AKs going off for 5 days. It did until a decade ago.
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करपात्री जी के खंडन के क्रम में षष्ठ पुष्प की प्रकाशन-पूर्व प्रति प्रस्तुत है, जो ९९ पृष्ठों में सैकड़ों प्रमाणों से युक्त है। कवष ऐलूष के विषय में करपात्री जी का असत्यमूलक मत मीमांसा, व्याकरण, न्याय, धर्मशास्त्र आदि अनेक विद्यास्थानों का उल्लंघन करता है।
drive.google.com/file/d/1VAS…
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धीरेन्द्र शास्त्री @bageshwardham से निजी खुन्नस है तो बात अलग है लेकिन क्या वो पहले कथावाचक हैं जिन्होंने कन्हैया को टेढ़ा कहा? सभी ये मानते हैं कि राम जिन मर्यादाओं में बंधे रहे, कन्हैया उन सब से स्वतंत्र रहे। उनका नाम त्रिभंगीलाल है मतलब तीन जगह से टेढ़े।
रविन्द्र जैन को सुनिए
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जय श्री कृष्ण
बांके बिहारी का अर्थ टेढ़ा बिहारी ही हम त्रिभंगी का अर्थ भी यही है। श्रीठाकुरजी महाराज 3 जगह से शरीर को मोड़कर खड़े होते हैं बंसी बजाते हुए उसे त्रिभंगी मुद्रा कहते हैं। और भगवान् श्रीकृष्ण टेढ़े ठाकुर हैं ये भला कौन नहीं जानता? धर्म के लिए किसी भी हद के टेढ़ेपन का विनियोग भगवान् करते हैं धर्म की रक्षा हेतु। भगवान ने छलों में स्वयं को द्यूत कहा है। भगवान् से आत्मीय सम्बन्ध रखने वाले भक्त यह सब समझते हैं। सीधे खड़े हुए भगवान् श्रीकृष्ण की मूर्ति बहुत ही कम मंदिरों में होती है। जबकि भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम रूप में हैं और उनकी सभी मूर्ति सीधे खड़े हुए ही होती हैं।
भगवान् श्रीराम और भगवान श्री कृष्ण में तत्त्वतः अभेद होते हुए भी लीला व स्वरूप का भेद है, इस अन्यता में वस्तुतः अनन्यता ही है। इसे थोड़ा ऐसे समझ सकते हैं,
काल की आवश्यकता के अनुसार भगवान् का अवतार ग्रहण होता है। भगवान् श्री राम धर्मावतार हैं और भगवान् श्रीकृष्ण आध्यात्मावतार हैं।
भगवान् श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और भगवान्श्री कृष्ण लीला पुरुषोत्तम हैं।
धर्मावतार के कारण श्रीराम का हर कार्य एकदम स्पष्ट और आँख मूँद कर अनुकरणीय है, क्योंकि लोकशिक्षण के लिए भगवान् ने धर्म को ही अपने कर्म व चरित्र में प्रकट कर दिया, और आध्यात्मावतार के कारण श्रीकृष्ण की लीलाएं समझना बिना भक्ति, श्रद्धा और निर्मल मन के नहीं बन सकता।
श्री राम साक्षात् धर्म के मूर्तिमान स्वरूप हैं, मानो वेदवर्णित सारा धर्म भगवान में आविर्भूत हो गया, सरल मानव मन के सारे संशय क्षण में छिन्न भिन्न करने वाला। वेदव्यास जी कहते हैं, "मर्त्यावतारस्त्विह मर्त्यशिक्षणं..." श्री राम का अवतार मानव जीवन कैसा होना चाहिए, यह बताने के लिए विशेष हुआ।
श्रीकृष्ण का चरित्र लीला वैचित्र्य से भरा हुआ है, उनकी लीलाओं की विरोधाभासिता में निगूढ़ रहस्य भरा है। परन्तु रज और तम गुण उन्हें छू भी नहीं गया है, उनका प्रत्येक कर्म विशुद्ध सत्त्व है, शुद्ध उच्च आध्यात्म है, वेदों का निगूढ़ रहस्य है।
संसार के इतिहास का सारा का सारा धार्मिक व्याख्यान भगवान श्रीराम के जीवन में पर्यवसित होता है।
संसार के इतिहास का सारा का सारा आध्यात्मिक व्याख्यान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में पर्यवसित होता है।
भगवान् श्रीराम अपनी भगवत्ता की घोषणा नहीं करते, फिर भी उनके मनुष्य रूप में धर्म आचरण से ही वह प्रकट हो जाता है और सभी ऋषि मुनि भक्त उनमें भगवान् का दर्शन करते हैं। जबकि भगवान् श्रीकृष्ण के चरित्र में जन्म से ही कारागृह से आगमन, छकड़ा उलटना, पूतना वध आदि से महान आश्चर्यजनक घटनाओं की झड़ी लग जाती है, वे अपनी इस अलौकिक भगवत्ता को कभी गोपनीय नहीं करते अपितु इसकी घोषणा कर विराट स्वरूप भी दिखा देते हैं।
पर तत्त्वतः श्री राम ही कृष्ण हैं और श्री कृष्ण ही राम हैं।
उपरोक्त बातों पर चिंतन करें। श्रीभगवान् अनन्तकोटिब्रह्माण्डनायक हैं, सर्वशक्तिमान, सर्वाधार, सर्वान्तर्यामी हैं, उनको अपने बित्ती भर दिमाग की कोठरी में बाँधने की चेष्टा न करें।
श्रीराम रूप में भगवान ने हमारे लिए अनुकरणीय सब बता दिया है, फिर भक्तकारुण्यवश हमारे कल्याण के लिए ही श्रीकृष्ण ने गीता को प्रकट किया। इसलिए रामायण के अनुसार जीवन जीकर गीता के अनुसार उसको प्राप्त करें। श्री राम के जीवन को धर्म में और श्री कृष्ण के जीवन को अध्यात्म में पाथेय बनाएं।
जय श्री राम
जय श्री कृष्ण
―― @MuditUpdates
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ऐसा कई बार हुआ है कि प्रकृति स्वयं ही मोदी जी का साथ देती है!
2014 का यह एक फोटो देखिए जब बनारस में हवा ने भाजपा का बैनर उड़ा दिया पर हवा ने मोदीजी का साथ दिया थामे रखा।...
एक दूसरा फोटो भी है जब मोदीजी का बैनर आंधी में नहीं उड़ा। ऐसे पता नहीं कितने वाकये हैं। 2014 के पहले भारत में पुतला फूंकने की राजनीति बहुत होती थी। पर कांग्रेसियों ने शायद 2-3 बार मोदीजी का पुतला फूंकने की कोशिश की, हर बार फूंकने वाला ही आग की चपेट में आ गया। इसके बाद पुतला फूंकने की राजनीति लगभग खत्म हो गई। इस पर ये लाइनें सही बैठती हैं!...
जब "विपक्ष" चले तो साया भी अपना न साथ दे
जब मोदी चले तो जमीं चले .आसमां चले !
नेता मीडिया और जनता की क्या बात करें
सारा ज़माना चले तूफ़ान चले, फ़िज़ा चले !
इरादा हो अटल तो मो'जिजः ऐसा भी होता है।
दिए को ज़िंदा रखती है हवा, ऐसा भी होता है। ❤️
#मोदी_कहीं_नहीं_जाएगा
@MuditUpdates मैने ले लिया भाई सा आपका लेख....🙏🫶👌
#RamlilaMaidan
































