
हम आंह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता। ہم تیری ہی عبادت کرتے ہیں اور تجھ سے ہی مدد مانگتے ہیں۔ अपनी क़यादत #TM
विश्व गुरु
Joined October 2019
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अपने तो अपने होते हैं :
@aimim_national के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद हैदराबाद जनाब #BR. @asadowaisi साहब ने शहीद हाफिज साद रह०अलै० के वालिद साहब से बात की और अपनी सम्वेदना प्रकट करते हुए ये आश्वासन दिया कि मैं हर संभव मदद करूंगा। अल्लाह हमारे सदर को लम्बी उम्र अता करे।
@AadilHasanAdv1 @Akhtaruliman5 @ChaandK007 @IamShaikhAdil @Qayadat123 @Furqan2443 @aafaquehussai15 @awafaazmi @abdu_javed @Aimim_Shahzade
سیِّد بابا retweeted
संजय सिंह नाम का व्यक्ति मुस्लिम समुदाय की लड़कियों के बारे में आपत्तिजनक लिरिक्स लिखकर गाने बना रहा था और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहा था। अब मोतिहारी पुलिस उसकी तलाश कर रही है और उसकी जानकारी देने वाले को ₹10,000 का इनाम देने की घोषणा की गई है।
सोशल मीडिया पर महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाना, उन्हें बुली करना और उनके बारे में अभद्र बातें लिखना , AI से एडिटेड गंदे फोटोज शेयर करना या गाना गाना अब कुछ लोगों के लिए आम बात होती जा रही है। मनचलों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि उन्हें कानून का भी डर नहीं रह गया है।
महिलाओं की गरिमा और सम्मान किसी जाति या धर्म का विषय नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी होनी चाहिए। ऐसी हरकतों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि कोई भी सोशल मीडिया को महिलाओं के अपमान का अड्डा न समझ बैठे।
इन लफंगो के मन मस्तिष्क में कानून का डर होना बहुत जरूरी है ।
سیِّد بابا retweeted
हम अपने लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ते चाहे हालात जैसे भी हो. आज जब आंदोलन बड़ा हुआ तो कई पार्टी के लोग क्रेडिट लेने आ गए मगर क्या आप भूल गए कि जामिया में स्टूडेंट यूनियन के लिए आंदोलन की शुरुआत किसने की थी. युवा साथी Jaasim और रेहान तुम्हें मायूस होने की जरूरत नहीं. जब इस आंदोलन का इतिहास लिखा जाएगा तो तुम्हारा नाम भी लिखा जाएगा और कोई तुमसे क्रेडिट नहीं छीन सकता. हम खड़े हैं आपके साथ मजबूती से. हौसला और हिम्मत रखिए और फख्र महसूस कीजिए ✌️👏👏❤️
سیِّد بابا retweeted
तुम्हारे 37 MP के आगे
अकेला बब्बर शेर 🦁 है मेरा सदर
तुम 37 MP ले के झाँ****T नहीं कबाड़ पा रहे हो कियूँ की
गोमती रिवर फ़्रंट कि वजह से अंडा 🥚 BJP के हाथों में है फोड़ दिया जाएगा
कांड कर के बैठे हो तो जनता के लिए झाँ****T करोगे
سیِّد بابا retweeted
Libaas Qeemti Pehen Kar Koi Bada Nahi Hota,
Jaha Zameer Bik Jaaye,
Waha Waqaar Khada Nahi Hota
Humne Dekha Hai Mitti Ke Gharon Mein Rehne Walo Ko,
Jinki Quddari Ke Aage Koi Mehal Bada Nahi Hota
#LateNightThought
سیِّد بابا retweeted
#Madhya_Pradesh Hindoria, Damoh.
Dear world look how Majority celebrate their feast here in India.
A video from Hindoria in Madhya Pradesh's Damoh district, on October 20, Hindutva supporters taking part in an akhada procession outside Jama Masjid. Some participants are seen brandishing swords as shots are fired into the air amid chants of "JSR" and "Har Har Mahadev."
سیِّد بابا retweeted
काफी दिनों से मैं एक बात गौर कर रहा हूँ कि आम मुसलमानों के बीच असदुद्दीन ओवैसी साहब की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आज बड़ी तादाद में मुसलमान उन्हें अपना सियासी नेता मानने लगे हैं। मेरा मानना है कि आम मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा अब अपनी सियासी आवाज़ और हिस्सेदारी को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुका है।
मुसलमानों को अगर दो हिस्सों में समझें, तो एक तरफ आम मुसलमान हैं और दूसरी तरफ सियासत करने वाले मुसलमान। दिलचस्प बात यह है कि आम मुसलमान ओवैसी साहब को स्वीकार कर रहा है, लेकिन कुछ सियासी लोगों को आज भी उन्हें स्वीकार करने में परेशानी हो रही है। कोई बी टीम कहता है, कोई सी टीम, तो कोई बीजेपी की टीम बताने लगता है।
अब सवाल यह है कि आखिर बी टीम है कौन? कभी कांग्रेस, सपा को बीजेपी की बी टीम बताती है, कभी सपा कांग्रेस को बीजेपी का फायदा पहुँचाने वाली पार्टी बताती है। कभी बसपा पर यही इल्जाम लगता है, तो कभी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी पर। यानी चुनाव आते ही हर पार्टी के पास दूसरी पार्टी को बी टीम बताने का सर्टिफिकेट तैयार रहता है! 😂
लेकिन अब आम मुसलमान हर बार इन सियासी जुमलों में आने वाला नहीं है। उसे भी समझ में आने लगा है कि लोकतंत्र में अपनी आवाज़, अपनी नुमाइंदगी और अपनी हिस्सेदारी होना कितना जरूरी है।
और जो लोग कहते हैं कि ओवैसी साहब वोट काटते हैं या बीजेपी को फायदा पहुँचाते हैं, उनसे मेरा एक सीधा सा सवाल है।
अगर वाकई आपको लगता है कि ओवैसी साहब की वजह से आपका नुकसान हो रहा है, तो फिर उन्हें गठबंधन में शामिल क्यों नहीं कर लेते?
ओवैसी साहब तो बार-बार गठबंधन की बात करते हैं। आप उन्हें 15-20 सीटें देकर देख लीजिए। अगर आपको इतना ही भरोसा है कि आप बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो फिर सीटें देने में इतनी परेशानी क्यों है? या फिर परेशानी बीजेपी को हराने से ज्यादा अपनी कुर्सी और हिस्सेदारी बचाने की है?
अब मुसलमानों को हर चुनाव में बीजेपी का डर दिखाकर वोट लेने का पुराना तरीका ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। मुसलमान अब सिर्फ डर की सियासत नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी की बात भी करेगा।
इंशाअल्लाह, 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बहुत कुछ साफ कर देगा। जो लोग आज ओवैसी साहब को हल्के में ले रहे हैं, उन्हें चुनाव के नतीजे आने तक इंतजार करना चाहिए।
क्योंकि अब सवाल सिर्फ किसी पार्टी को जिताने या हराने का नहीं है, सवाल है अपनी सियासी पहचान, अपनी आवाज़ और अपनी हिस्सेदारी का।
हिस्सेदारी भी चाहिए और इज्जत भी चाहिए। अब सिर्फ वोट बैंक बनकर नहीं रहना है!
#AsaduddinOwaisi #AIMIM #UPElection2027 #MuslimPoliticalRepresentation #Hissedari #ApniAwaaz #InshaAllah
काफी दिनों से मैं एक बात गौर कर रहा हूँ कि आम मुसलमानों के बीच असदुद्दीन ओवैसी साहब की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। आज बड़ी तादाद में मुसलमान उन्हें अपना सियासी नेता मानने लगे हैं। मेरा मानना है कि आम मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा अब अपनी सियासी आवाज़ और हिस्सेदारी को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो चुका है।
मुसलमानों को अगर दो हिस्सों में समझें, तो एक तरफ आम मुसलमान हैं और दूसरी तरफ सियासत करने वाले मुसलमान। दिलचस्प बात यह है कि आम मुसलमान ओवैसी साहब को स्वीकार कर रहा है, लेकिन कुछ सियासी लोगों को आज भी उन्हें स्वीकार करने में परेशानी हो रही है। कोई बी टीम कहता है, कोई सी टीम, तो कोई बीजेपी की टीम बताने लगता है।
अब सवाल यह है कि आखिर बी टीम है कौन? कभी कांग्रेस, सपा को बीजेपी की बी टीम बताती है, कभी सपा कांग्रेस को बीजेपी का फायदा पहुँचाने वाली पार्टी बताती है। कभी बसपा पर यही इल्जाम लगता है, तो कभी चंद्रशेखर आजाद की पार्टी पर। यानी चुनाव आते ही हर पार्टी के पास दूसरी पार्टी को बी टीम बताने का सर्टिफिकेट तैयार रहता है! 😂
लेकिन अब आम मुसलमान हर बार इन सियासी जुमलों में आने वाला नहीं है। उसे भी समझ में आने लगा है कि लोकतंत्र में अपनी आवाज़, अपनी नुमाइंदगी और अपनी हिस्सेदारी होना कितना जरूरी है।
और जो लोग कहते हैं कि ओवैसी साहब वोट काटते हैं या बीजेपी को फायदा पहुँचाते हैं, उनसे मेरा एक सीधा सा सवाल है।
अगर वाकई आपको लगता है कि ओवैसी साहब की वजह से आपका नुकसान हो रहा है, तो फिर उन्हें गठबंधन में शामिल क्यों नहीं कर लेते?
ओवैसी साहब तो बार-बार गठबंधन की बात करते हैं। आप उन्हें 15-20 सीटें देकर देख लीजिए। अगर आपको इतना ही भरोसा है कि आप बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो फिर सीटें देने में इतनी परेशानी क्यों है? या फिर परेशानी बीजेपी को हराने से ज्यादा अपनी कुर्सी और हिस्सेदारी बचाने की है?
अब मुसलमानों को हर चुनाव में बीजेपी का डर दिखाकर वोट लेने का पुराना तरीका ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है। मुसलमान अब सिर्फ डर की सियासत नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी की बात भी करेगा।
इंशाअल्लाह, 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बहुत कुछ साफ कर देगा। जो लोग आज ओवैसी साहब को हल्के में ले रहे हैं, उन्हें चुनाव के नतीजे आने तक इंतजार करना चाहिए।
क्योंकि अब सवाल सिर्फ किसी पार्टी को जिताने या हराने का नहीं है, सवाल है अपनी सियासी पहचान, अपनी आवाज़ और अपनी हिस्सेदारी का।
हिस्सेदारी भी चाहिए और इज्जत भी चाहिए। अब सिर्फ वोट बैंक बनकर नहीं रहना है!
#AsaduddinOwaisi #AIMIM #UPElection2027 #MuslimPoliticalRepresentation #Hissedari #ApniAwaaz #InshaAllah
سیِّد بابا retweeted
पूर्वी चंपारण के AIMIM जिला अध्यक्ष जनाब डॉक्टर शमीमुल हक़ साहब का तहेदिल से शुक्रिया, जिन्होंने इस वीडियो को देखते ही मामले का संज्ञान लिया और बिना देर किए प्रदेश के AIMIM नेताओं से बातचीत की। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन प्राप्त किया।
इस पूरे मामले में चंपारण तहज़ीब की भी खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। हमारे हिंदू भाइयों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस नफ़रती हरकत के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद करते हुए कार्रवाई की मांग की।
मैं उन तमाम लोगों का भी जिन्होंने सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाई उनका दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने इंसाफ़ की इस लड़ाई में हमारा साथ दिया। यही हमारी असली ताक़त है। नफ़रत फैलाने वाले चंद लोग पूरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। चंपारण की पहचान आपसी भाईचारे, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब से है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना है।
इंसाफ़ की आवाज़ किसी एक मज़हब की आवाज़ नहीं होती, बल्कि हर इंसाफ़ पसंद इंसान की आवाज़ होती है।
पूर्वी चंपारण के AIMIM जिला अध्यक्ष जनाब डॉक्टर शमीमुल हक़ साहब का तहेदिल से शुक्रिया, जिन्होंने इस वीडियो को देखते ही मामले का संज्ञान लिया और बिना देर किए प्रदेश के AIMIM नेताओं से बातचीत की। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन प्राप्त किया।
इस पूरे मामले में चंपारण तहज़ीब की भी खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। हमारे हिंदू भाइयों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इस नफ़रती हरकत के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद करते हुए कार्रवाई की मांग की।
मैं उन तमाम लोगों का भी जिन्होंने सोशल मीडिया पर आवाज़ उठाई उनका दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ, जिन्होंने इंसाफ़ की इस लड़ाई में हमारा साथ दिया। यही हमारी असली ताक़त है। नफ़रत फैलाने वाले चंद लोग पूरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। चंपारण की पहचान आपसी भाईचारे, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब से है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना है।
इंसाफ़ की आवाज़ किसी एक मज़हब की आवाज़ नहीं होती, बल्कि हर इंसाफ़ पसंद इंसान की आवाज़ होती है।
سیِّد بابا retweeted
Sooner or later Muslims will maintain distance from all the parties who refrain from publicly recognizing atrocities on Muslims,And it must happen ✊✊
سیِّد بابا retweeted
Andhra Pradesh Local Body Elections: Aap tamaam voters se meri dili guzarish hai ki 1st November 2026 ko badi tadaad mein apne gharo'n se niklein aur Patang par Vote dekar AIMIM ummeedwaro'n ko kamyab karein.
InshaAllah! ye jeet ittehaad aur awaam ki jeet hogi.
Andhra Pradesh ki awaam se AIMIM President Barrister @asadowaisi Sahab ki appeal.
سیِّد بابا retweeted
Ye subse bada jhoot jo Musalmanon ko Parosa gaya, aur Apney qaum kuch naami kami log Secular parties mai rehtey Qaum ko kamzoor karne ki kaam kiye! Everyone should start writing names of riots and massacres against Muslims from their areas, and who were ruling their area at that time under this tweet, what I wonder about is then why Hindi belt Muslims on the name of security still believe in these foxes!
Replying to @IAasMohd
जब जब मजहबी पार्टी की मांग हुई है
देश में कट्टरता बढी़ है
1906-1947 तक देश में नफरत फैलती रही
जब मजहबी पार्टी पड़ोस के देश चली गयी
तो देश में सुकून दोबारा से मिला
1947-2012 तक सेक्युलर सरकारों में देश में अमन और भाईचारा मौजूद रहा
लेकिन 2012 में एक जगह से 15 मिनट वाला बयाध आया
वहीं से बीजेपी को आईडिया आया
कि क्यों न इनको हैदराबाद से निकाल कर हर राज्य भेज दिया जाए
जिससे ज़ाहिर तबका कौम की अलग पार्टी के चूरन में फंस जाए
سیِّد بابا retweeted
10 हजार इनाम की घोषणा..
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@bihar_police @IPRDBihar @BiharHomeDept @Dm_Motihari
#HaiTaiyaarHum #bihar #chamaparan #motihari



















