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अंधभक्त: माँ मैं शर्त लगा आया कि भैंस सफ़ेद होती है....
माँ: बेटा तू शर्त हार जाएगा।
अंधभक्त : हारूँगा तो तब न जब मैं मानूँगा..!
😉😉😉
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For years I kept these memories to myself. Some were too painful to speak of, others too precious. In Belonging, I have finally written them down.
My conversation with @guardian ↓
theguardian.com/world/2026/n…
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#अंकिता_हत्याकांड के विरोध में जन आक्रोश
"अमित शाह मुर्दाबाद"
सारे आंदोलनों के खिलाफ पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही महाभ्रष्ट मोदी सरकार
#EVM_हटाओ_हत्यारे_भगाओ
#AmitShahGoBack
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उत्तर प्रदेश में 'योगी सरकार' प्रचार पर हर दिन 2.3 ₹ करोड़ खर्च कर रही है
खर्च में 'मोदी सरकार' को भी पीछे छोड़ा- न्यूजलॉंड्री की रिपोर्ट
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जिनके लिए शहनाई नहीं बजी, उनसे और क्या उम्मीद करना?
भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी ‘कला और कलाकारों’ के हमेशा ख़िलाफ़ रहते हैं क्योंकि इन पुरातनपंथी-रूढ़िवादियों की ये संकरी मानसिकता होती है कि रचनात्मक लोग ही समाज में परिवर्तन की भूमि और भूमिका बनाते हैं। सकारात्मक कला सहृदयता को जन्म देती है और सहनशीलता को भी। इसीलिए कला के हर रूप को ये अपने एजेंडे के रास्ते में रोड़ा मानते हैं या फिर कला को अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल करके उसको नकारात्मक बना देना चाहते हैं।
जिनके आगे ‘भारत रत्न’ लगा हो उनकी मिलीजुली विरासत को ध्वस्त करना, उनके मान-सम्मान के साथ-साथ ‘भारत’ के मान को भी ध्वस्त करने के समान है।
भाजपा नफ़रत की आग में जलकर देश को नुक़सान पहुँचा रही है।
सरकार में आने पर हम ‘भारत रत्न बिस्मिल्लाह ख़ान’ जी की सांगीतिक धरोहर को बचाने के लिए ‘श्रवण-संग्रहालय’ बनाएंगे
घोर निंदनीय!
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अब अमित शाह और नरेंद्र मोदी व संघ वालों को भी
पता चल गया है कि अब झूठ नहीं चलेगा ? 😜😜
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पहले 'वोट चोरी' फिर 'चंदा चोरी' अब 'पेट्रोल' E20 बोलकर E30 मिलाकर 'पेट्रोल चोरी' कर रहे हैं
: गौरव गोगोई, सांसद
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“Rahul and Priyanka, rushed to my arms in tears. When they had been abruptly picked up from school by black-uniformed commandos, they sensed a catastrophe. Once home, they saw some of the staff sobbing.
They asked question after question. “Where’s Mama?” “Why have we been brought home?” “Where’s Papa?” “What’s happened?” “Where’s Dadi?” “You aren’t telling us the truth!”
I wanted to sit with them and hug them, to break the news to them gently, but I was unable to – I had to go back; Rajiv was coming to the hospital.”
For the first time, @SoniaGandhi ji opens her heart to recount the spine-chilling moments of Indira ji’s assassination - not merely the brutal violence against India’s Prime Minister, but the shattering loss of a mother, the pillar of the family, and a doting grandmother.
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"I’m in the car now, facing her. Blood on her sari, blood on her chest."
CPP Chairperson Smt. @SoniaGandhi ji recalls the killing of her mother-in-law, Smt. Indira Gandhi ji, in her memoir, Belonging: A Journey of Love.
Here is an excerpt from her book, featured in The Guardian on 7 November. 👇
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चंदा चोरी, आस्था धोखा
चोरी पर पर्दा डालने की कोशिश में सरकार के अपने ही बयान अब उससे सवाल पूछ रहे हैं। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी ही कहानी के ऐसे तथ्य रख दिए हैं, जिनसे सवाल और गहरे हो गए हैं।
देश की जनता के मन में सवाल है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ मौन साधकर चोरों को मूक समर्थन क्यों दे रहे हैं? पहले दिन से चंदा-चढ़ावा चोरी के पाप पर पर्दा डालने की कोशिश क्यों हो रही है?
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहली SIT राज्य सरकार ने खुद बनाई थी, वह भी ट्रस्ट के अनुरोध पर।
13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय SIT गठित की। इसकी प्रारम्भिक रिपोर्ट 23 जून को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई, जिनके ट्रस्ट से पदेन सदस्य के रूप में जुड़े होने की बात भी सामने आई है।
6 जुलाई 2026 को ट्रस्ट की बैठक में इस रिपोर्ट पर चर्चा हुई। इसके बाद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ट्रस्ट के लोगों ने कोई विश्वासघात नहीं किया। उन्होंने चम्पत राय के चरित्र पर भरोसा जताते हुए उनकी “सेवाओं का अभिनंदन” किया। यानी जाँच में गंभीर सवाल उठने के बावजूद ट्रस्ट नेतृत्व ने भाजपा-आरएसएस-विहिप से जुड़े अपने लोगों का सार्वजनिक बचाव किया।
दूसरी SIT: सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बनी
27 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद IG किरण एस के नेतृत्व में दूसरी SIT की जाँच में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल किया गया।
17 अगस्त 2026 को इस SIT की प्रगति रिपोर्ट राज्य सरकार ने “Confidential Report” के रूप में सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। अदालत के निर्देश के अनुसार, जाँच जारी होने के कारण रिपोर्ट गोपनीय रखी गई और याचिकाकर्ताओं को नहीं दिखाई गई।
तीन सीधे सवाल हैं:
1. जब दूसरी SIT की रिपोर्ट जाँच जारी होने के कारण गोपनीय रखी गई, तो पहली SIT की रिपोर्ट ट्रस्ट की बैठक में कैसे पहुँची और उस पर चर्चा कैसे हुई? क्या यह वही ट्रस्ट नहीं था जिसके पदाधिकारियों की भूमिका और बयान जाँच के दायरे में थे? जाँच की रिपोर्ट उन लोगों तक पहुँचाने का आधार और उद्देश्य क्या था?
2. पहली SIT की रिपोर्ट तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई, जिनके ट्रस्ट से पदेन सदस्य के रूप में जुड़े होने की बात सामने आई है। क्या यह हितों के टकराव का गंभीर सवाल नहीं है? और क्या उसी रिपोर्ट पर ट्रस्ट नेतृत्व द्वारा चम्पत राय का सार्वजनिक बचाव करना जाँच की निष्पक्षता और साक्ष्यों की सुरक्षा पर सवाल नहीं खड़े करता? सरकार ने इस स्थिति में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए?
3. जब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दूसरी SIT और फॉरेंसिक ऑडिटर की जरूरत पड़ी, तो अब उत्तर प्रदेश सरकार अपनी SIT की जाँच पूरी बताकर पूरे मामले को समाप्त मानने की कोशिश क्यों कर रही है? क्या आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होना ही पर्याप्त है? वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका, निगरानी में हुई विफलताओं और पूरे ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन की स्वतंत्र जाँच क्यों नहीं होनी चाहिए? सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे की पड़ताल और जवाबदेही तय करने से क्यों पीछे हट रही है?
चंदा और चढ़ावा देश की आस्था है, किसी की निजी जागीर नहीं। करोड़ों श्रद्धालुओं की अमानत का हिसाब देना ही होगा। चंदा और चढ़ावा चोरी का पूरा सच देश के सामने आना चाहिए और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए।
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Happy birthday, Thiru @ikamalhaasan. Wishing you good health, happiness and many more years of brilliant work, on screen and in public life.
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The fight against Mohan-Modi-Shah-Gyanesh is not a fight for a chair or a position.
It is a fight to safeguard the soul of our Constitution and democracy, and to honour the supreme sacrifices made by generations who fought to protect our country.
It is everybody's struggle.
That is also Rahul Ji’s call: All Protests Are One.
Congress General Secretary (Organisation) Shri @kcvenugopalmp spoke to the Hindustan Times.
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To be made to feel like an outsider in your own country - a country you came to through love, made your home through marriage, built a happy family in, and where you eventually endured an unimaginable tragedy - must have been deeply hurtful. More so when such doubts came from colleagues and people you had placed your trust in.
But not everyone allows personal hurt and disappointment to stand in the way of a larger purpose. Some choose to rise above it. And carry on.
Smt. Sonia Gandhi's interview with @the_hindu





















