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Neither Writer I Nor Painter errr Part Timer I Usual IT guy I Love Comics I Like RD/Kishore Da/Gulzar I Still locked in 90's. Personal Views I Non Political

Salford, England
Joined January 2014
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Why he got two seaters?
Nahi SRK, yeh woh gate nahi hai. Hum Twitter par Delhi Gate 📖😇roz dekhte hain, Modi ji dikhate hain✨🤌🏼 #It'ssunday ..😇🎥
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Experienced Ramayana today. Did I enjoy it? Yes. Repeat value? No. Low point: Dialogues, songs. Overly long scenes, such as Ram leaving the Ajodhya. High point: VFX, presentation and acting. Sai Pallavi? As predicted, will grow on audience. Did I click any pic? No :)
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There were a couple of British white people in the audience, and they seemed to enjoy the movie too. Though they did take loo breaks during songs! This indicates it is boring.😄 One request to @DrKumarVishwas: please don't write songs again. It’s simply not your forte!
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Just like Thanos won in Infinity War, Ravan wins in Part 1. Last and final question....Is it a communist movie? Could be, depends on your understanding of film making.
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अमृतकाल = असहिष्णुता
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शाखों से टूटे पत्ते भटकते हैं किसी किनारे की तलाश में
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Christmas week is a holiday in the UK, so we get paid 1.5 to double if we work during this period. Sadly, professionals in India don't get any extra pay or perks if they have to work during Diwali.
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कभी एम्स के बाहर जाकर देखा है? वहां देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों-हजारों मरीज और उनके तीमारदार फुटपाथों पर रातें गुजारते हैं। इस दिवाली, पटाखों पर पैसे बर्बाद करने के बजाय उनकी मदद कीजिए। किसी बेबस मरीज को फल बांटिए, उनकी महंगी जांचों का खर्च उठाइए,
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किसी प्राइवेट डॉक्टर की फीस भर दीजिए या उनकी दवाइयां खरीद कर दीजिए। उस दर्द और मजबूरी के बीच जब उनके हाथ आपके लिए दुआ में उठेंगे, तो जो दिल से आशीर्वाद निकलेगा, असली पुण्य और सच्ची दिवाली उसी को कहते हैं। स्कंद पुराण भी कहता है अंधेरी जगहों पर दिया जलाएं।
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जिस तरह से भगवान भारतवर्ष की धरती पर अवतरित लेते हैं, उसी तरह से प्रदूषण भी अवतरित हुआ है। जो चीज भगवान ने भेजी है उससे छुटकारा नहीं होना चाहिए।
Pollution and politics : Crackers have religion linked to it Parali has states and farmers Cars have economic interests Dust has only negligence 🙏🙏🙏 @PMOIndia @byadavbjp @DC_Gurugram @cmohry @CAQM_Official
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It should be looked into context. Hanuman ji was telling the condition of Shri Ram to Sita ji in Ashok Vatika. It was that he stopped eating meat... Ramcharitmanas is modern day retelling. Ramayana should be source material.
वाल्मीकि रामायण – सुन्दरकाण्ड 5.36.41 मूल संस्कृत श्लोक: न मांसं राघवो भुङ्क्ते न चापि मधु सेवते । वन्यं सुविहितं नित्यं भक्तमश्नाति पञ्चमम् ॥ हिंदी अर्थ: श्री राघव (राम) न तो मांस खाते हैं और न ही मधु का सेवन करते हैं। वे प्रतिदिन वन में उपलब्ध विधिपूर्वक प्राप्त भोजन ही ग्रहण करते हैं। राजा भरत की सेना के लिए मांस और मदिरा की व्यवस्था करने का उदाहरण वाल्मिकी रामायण में तो मिलता है । हालांकि रामचरितमानस को अगर रिफरेन्स पॉइंट माना जाये तो और क्लियर होता के कलयुग ऋषि-निमित जी के रिसर्चर झूठ बोल रहे है ।
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Replying to @MuditUpdates
@MuditUpdates दीपावलीका स्पष्ट उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है। वेदो य प्रमुख उपनिषदों में आज के दीपावली पर्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। स्कन्द पुराण में दीपदान का वर्णन अंधकारमय स्थानों, चौराहों, शिवालयों, देवालयों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप जलाने के संदर्भ में मिलता है।
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जब पढ़ा न हो और तथ्यों का ज्ञान न हो, तो किसी को भी फ़र्ज़ी आईडी के पीछे छिपकर मुसलमान बता देना आसान है। आप जैसे घटिया सोच वाले लोग अक्सर यही करते हैं।
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वाल्मीकि रामायण का दशानन तो शिव को पहचानता तक नहीं। अहंकार में वह नन्दी से पूछ बैठता है, "कौन शङ्कर ?" बाद में सामवेद के मंत्रों से शिव की स्तुति करता है! शिव पुराण आते-आते रावण एक महान विद्वान और पण्डित बन जाता है।अब रावण पुराण आने तक कहीं उसे चौथा देवता ही न घोषित कर दिया जाए!
शिव महापुराण में लंकापति रावण का वर्णन केवल एक अहंकारी राक्षस के रूप में नहीं, बल्कि भगवान शिव के एक परम भक्त, प्रखर विद्वान और कठोर तपस्वी के रूप में हुआ है। पुराण की विभिन्न संहिताओं (विशेषकर कोटिरुद्र संहिता और रुद्र संहिता) में रावण से जुड़ी कथाएं विस्तार से मिलती हैं: 1. कठोर तपस्या और सिरों का समर्पण शिव महापुराण के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय के समीप घोर तपस्या की। जब लंबे समय तक तप करने पर भी शिवजी प्रकट नहीं हुए, तो उसने अपनी निष्ठा और भक्ति की पराकाष्ठा दिखाते हुए एक-एक करके अपने नौ सिर काटकर अग्नि में आहुति के रूप में समर्पित कर दिए। जब वह अपना दसवां सिर काटने लगा, तब भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होकर साक्षात प्रकट हुए। महादेव ने उसके सभी कटे हुए सिरों को पुनः जोड़ दिया और उसे अतुलनीय पराक्रम व अजेयता का वरदान दिया। कटे हुए सिरों को जोड़ने और रोग-पीड़ा मुक्त करने के कारण भगवान शिव का एक नाम 'वैद्यनाथ' पड़ा। 2. आत्मलिंग और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना वरदान प्राप्त करने के बाद रावण ने महादेव से प्रार्थना की कि वे लंका चलकर स्थायी रूप से निवास करें। भगवान शिव ने उसे अपना आत्मलिंग देते हुए एक शर्त रखी: "यदि मार्ग में तुमने इस लिंग को कहीं भी भूमि पर रख दिया, तो यह वहीं अचल होकर स्थापित हो जाएगा।" देवताओं के अनुरोध पर वरुण देव और भगवान विष्णु की लीला से मार्ग में रावण को तीव्र लघुशंका की अनुभूति हुई। उसने वह शिवलिंग पास खड़े एक ग्वाले (अहीर) को पकड़ा दिया। लिंग के अत्यधिक भार के कारण ग्वाले ने उसे पृथ्वी पर रख दिया। लौटने पर रावण ने पूरी शक्ति लगाकर उसे उखाड़ने की कोशिश की, किंतु वह हिला तक नहीं। वही स्थान आगे चलकर कामना लिंग / बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कहलाया (जो वर्तमान में देवघर, झारखंड में स्थित है)। 3. कैलाश पर्वत उठाना और 'रावण' नामकरण एक बार जब रावण का पुष्पक विमान कैलाश पर्वत के ऊपर से नहीं गुजर सका, तो अहंकार में आकर उसने संपूर्ण कैलाश पर्वत को ही अपनी भुजाओं पर उठाना चाहा। भगवान शिव ने केवल अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को हल्का-सा दबा दिया। इससे रावण की भुजाएं पर्वत के नीचे दब गईं और वह असहनीय पीड़ा से जोर-जोर से चीत्कार करने लगा। उसकी तीव्र गर्जना (रौद्र रुदन) के कारण ही भगवान शिव ने उसका नाम 'रावण' (जिसका अर्थ है भयानक नाद करने वाला) रखा। 4. शिव तांडव स्तोत्र की रचना पर्वत के नीचे दबे होने के दौरान अपनी भूल का भान होने पर रावण ने भगवान शिव की स्तुति में अत्यंत छंदबद्ध, लयबद्ध और क्लिष्ट संस्कृत में स्तुति की, जिसे 'शिव तांडव स्तोत्र' कहा जाता है। उसकी स्तुति और भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने दबाव हटाकर उसे मुक्त किया और चंद्रहास खड्ग प्रदान किया। शिव महापुराण यह संदेश देता है कि रावण ज्ञान, तंत्र और तपस्या में अद्वितीय था, किंतु जब भक्ति में अहंकार और तामसिक प्रवृत्तियां जुड़ जाती हैं, तो वही पतन का कारण बनती हैं। इस प्रसंग को और गहराई से समझने के लिए Baidyanath Jyotirlinga Katha वीडियो देखें। इस वीडियो में रावण की तपस्या और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की पूरी पौराणिक कथा का सुंदर वर्णन है। #Ramayana #RamayanaReview #Ramayan
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The BORI edition identifies readings supported by the manuscript tradition; it does not identify the actual authors of individual episodes. They omitted the below stories.
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The Evolution of the Mahabharata: The Gradual Addition of Folklore, Later Narratives and the Dilution of Its Original Historical Core. 1. Jaya (जय) 8,800 by Vyasa 2. Bharata / Bharata Samhita (भारत) 24,000 by Vaishampayana 3. Mahabharata (महाभारत) 100000 by Ugrashrava Sauti
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3. Stories found in the present-day Mahabharata that are not part of the original Vyasa 24000 narrative : 1. Nala-Damayanti 2. Savitri-Satyavan 3. Rama Upakhyana (Ramayana) 4. Rishyashringa 5. Agastya and Lopamudra 6.Astika Upakhyana 7. Garuda's birth and exploits
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4. Jaya (8,800 verses) a possible reconstruction would include: 1. The rivalry between Kauravas and Pandavas. 2. The events leading to the war. 3. Krishna's role. 4. The eighteen-day battle. 5. The defeat of the Kauravas.
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Pushpak vimanas at Mumbai Airport.
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