YurInnerVoice (@YurInnerVoice) header
YurInnerVoice (@YurInnerVoice) profile picture

Neither Writer I Nor Painter errr Part Timer I Usual IT guy I Love Comics I Like RD/Kishore Da/Gulzar I Still locked in 90's. Personal Views I Non Political

Salford, England
Joined January 2014
शाखों से टूटे पत्ते भटकते हैं किसी किनारे की तलाश में
1
4
73
Replying to @SuhagAShukla
चटाई (Chatai)
1
3
1,306
Replying to @MuditUpdates
@MuditUpdates दीपावलीका स्पष्ट उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है। वेदो य प्रमुख उपनिषदों में आज के दीपावली पर्व का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। स्कन्द पुराण में दीपदान का वर्णन अंधकारमय स्थानों, चौराहों, शिवालयों, देवालयों और सार्वजनिक स्थलों पर दीप जलाने के संदर्भ में मिलता है।
1
17
Replying to @harshktweets
वाल्मीकि रामायण का दशानन तो शिव को पहचानता तक नहीं। अहंकार में वह नन्दी से पूछ बैठता है, "कौन शङ्कर ?" बाद में सामवेद के मंत्रों से शिव की स्तुति करता है! शिव पुराण आते-आते रावण एक महान विद्वान और पण्डित बन जाता है।अब रावण पुराण आने तक कहीं उसे चौथा देवता ही न घोषित कर दिया जाए!
1
41
वाल्मीकि रामायण का दशानन तो शिव को पहचानता तक नहीं। अहंकार में वह नन्दी से पूछ बैठता है, "कौन शङ्कर ?" बाद में सामवेद के मंत्रों से शिव की स्तुति करता है! शिव पुराण आते-आते रावण एक महान विद्वान और पण्डित बन जाता है।अब रावण पुराण आने तक कहीं उसे चौथा देवता ही न घोषित कर दिया जाए!
शिव महापुराण में लंकापति रावण का वर्णन केवल एक अहंकारी राक्षस के रूप में नहीं, बल्कि भगवान शिव के एक परम भक्त, प्रखर विद्वान और कठोर तपस्वी के रूप में हुआ है। पुराण की विभिन्न संहिताओं (विशेषकर कोटिरुद्र संहिता और रुद्र संहिता) में रावण से जुड़ी कथाएं विस्तार से मिलती हैं: 1. कठोर तपस्या और सिरों का समर्पण शिव महापुराण के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय के समीप घोर तपस्या की। जब लंबे समय तक तप करने पर भी शिवजी प्रकट नहीं हुए, तो उसने अपनी निष्ठा और भक्ति की पराकाष्ठा दिखाते हुए एक-एक करके अपने नौ सिर काटकर अग्नि में आहुति के रूप में समर्पित कर दिए। जब वह अपना दसवां सिर काटने लगा, तब भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होकर साक्षात प्रकट हुए। महादेव ने उसके सभी कटे हुए सिरों को पुनः जोड़ दिया और उसे अतुलनीय पराक्रम व अजेयता का वरदान दिया। कटे हुए सिरों को जोड़ने और रोग-पीड़ा मुक्त करने के कारण भगवान शिव का एक नाम 'वैद्यनाथ' पड़ा। 2. आत्मलिंग और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना वरदान प्राप्त करने के बाद रावण ने महादेव से प्रार्थना की कि वे लंका चलकर स्थायी रूप से निवास करें। भगवान शिव ने उसे अपना आत्मलिंग देते हुए एक शर्त रखी: "यदि मार्ग में तुमने इस लिंग को कहीं भी भूमि पर रख दिया, तो यह वहीं अचल होकर स्थापित हो जाएगा।" देवताओं के अनुरोध पर वरुण देव और भगवान विष्णु की लीला से मार्ग में रावण को तीव्र लघुशंका की अनुभूति हुई। उसने वह शिवलिंग पास खड़े एक ग्वाले (अहीर) को पकड़ा दिया। लिंग के अत्यधिक भार के कारण ग्वाले ने उसे पृथ्वी पर रख दिया। लौटने पर रावण ने पूरी शक्ति लगाकर उसे उखाड़ने की कोशिश की, किंतु वह हिला तक नहीं। वही स्थान आगे चलकर कामना लिंग / बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कहलाया (जो वर्तमान में देवघर, झारखंड में स्थित है)। 3. कैलाश पर्वत उठाना और 'रावण' नामकरण एक बार जब रावण का पुष्पक विमान कैलाश पर्वत के ऊपर से नहीं गुजर सका, तो अहंकार में आकर उसने संपूर्ण कैलाश पर्वत को ही अपनी भुजाओं पर उठाना चाहा। भगवान शिव ने केवल अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को हल्का-सा दबा दिया। इससे रावण की भुजाएं पर्वत के नीचे दब गईं और वह असहनीय पीड़ा से जोर-जोर से चीत्कार करने लगा। उसकी तीव्र गर्जना (रौद्र रुदन) के कारण ही भगवान शिव ने उसका नाम 'रावण' (जिसका अर्थ है भयानक नाद करने वाला) रखा। 4. शिव तांडव स्तोत्र की रचना पर्वत के नीचे दबे होने के दौरान अपनी भूल का भान होने पर रावण ने भगवान शिव की स्तुति में अत्यंत छंदबद्ध, लयबद्ध और क्लिष्ट संस्कृत में स्तुति की, जिसे 'शिव तांडव स्तोत्र' कहा जाता है। उसकी स्तुति और भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने दबाव हटाकर उसे मुक्त किया और चंद्रहास खड्ग प्रदान किया। शिव महापुराण यह संदेश देता है कि रावण ज्ञान, तंत्र और तपस्या में अद्वितीय था, किंतु जब भक्ति में अहंकार और तामसिक प्रवृत्तियां जुड़ जाती हैं, तो वही पतन का कारण बनती हैं। इस प्रसंग को और गहराई से समझने के लिए Baidyanath Jyotirlinga Katha वीडियो देखें। इस वीडियो में रावण की तपस्या और बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की पूरी पौराणिक कथा का सुंदर वर्णन है। #Ramayana #RamayanaReview #Ramayan
15
The BORI edition identifies readings supported by the manuscript tradition; it does not identify the actual authors of individual episodes. They omitted the below stories.
12
Replying to @rajputr_itihas
Yadavs trace their ancestry to the ancient Yayati/Yadu/Kroshtu lineage. Abhiras, on the other hand, were a distinct community with a separate historical identity. Abiras were not foreigners as this fact is not backed by History.
1
65
Pushpak vimanas at Mumbai Airport.
28
What they won't tell you is that the English-language version of Ramayana tanked at the box office. Not every grand narrative like use of Brahma AI translates into audience acceptance or commercial success. Next time "Made for Indian Audience". @WorldOfRamayana @malhotra_namit
74
Replying to @Bhumi__M026
Copy paste tweets can fetch you 11000 followers.
1
2
44